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पाकुड़ : आपसी सहभागिता से ही समाज से समाप्त की जा सकती है टीबी

Pakur : पॉलिटेक्निक कॉलेज पाकुड़ में जिला यक्ष्मा विभाग और एनजीओ पिरामल स्वास्थ्य के संयुक्त प्रयास से गुरुवार को टीबी जागरूकता अभियान का आयोजन किय़ा गया. कार्यक्रम में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ.एहतेशामुद्दीन ने शिक्षक और छात्रों को टीबी बीमारी के लक्ष्ण, जांच और उपचार की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि टीबी बीमारी माइकोबैक्टेरियम">https://www.google.com/search?q=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE+%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B8+%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&spell=1&sa=X&ved=2ahUKEwihtrmr8Lz9AhVx4jgGHdaIAfgQBSgAegQICBAB">माइकोबैक्टेरियम

ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से होता है, जो मुख्यतः फेफड़े को संक्रमित करता है. यह मानव शरीर के अन्य हिस्सों पर भी हो सकती है. टीबी बीमारी को आपसी सहभागिता से ही समाज से समाप्त किया जा सकता है. जिला पीपीएम समन्वयक सुशांत कुमार दुबे ने पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी. बताया गया कि सभी सीएचसी में टीबी के इलाज़ की सुविधाएं उपलब्ध हैं. सरकार की ओर से सभी टीबी मरीजों को 500 रूपये 6 माह तक पौष्टिक आहार के सेवन के लिए दी जाती है. बताया कि दो सप्ताह या उससे अधिक दिनों से खांसी आने, वजन कम होने, बुखार आने, रात मे सोने समय अत्यधिक पसीना आने और अत्यधिक थकान होने पर नजदीकी स्वास्थ केंद्र जाकर बलगम की जांच जरूर करानी चाहिए. कार्यक्रम में टीबी कॉलेज के प्राचार्य डॉ.सरोज पाढी, उप-प्राचार्य डॉ.ऋषिकेश गोस्वामी, मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी निखिल चंद्रा, परीक्षा नियंत्रक अमित रंजन और सभी शिक्षक, शिक्षिका मौजूद थे. यह">https://lagatar.in/pakur-mini-hembrum-of-the-district-won-silver-in-khelo-india-cycling-womens-league-3/">यह

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