alt="" width="300" height="225" /> पत्थर खदान बंद होने से बेरोजगार हुए मजदूर[/caption] क्रशर और खदान संचालक विभाग से परेशान पत्थर खदान और क्रशर के बंद होने से मजदूरों के सामने रोटी की समस्या खड़ी हो गई तो खदान संचालक भी भारी नुकसान झेल रहे हैं. खदान और क्रशर संचालकों का कहना है कि हर रोज किसी ना किसी कागज़ात के नाम पर उनके क्रशर और खदानों को सील किया जा रहा है. जब कागज़ातों के लिए अर्जी दी जाती है तो महीनों दौड़ाया जाता है. लिहाज़ा वो भी आज की व्यवस्था से हार चुके हैं. आर्थिक नाकेबंदी जैसे हालात – मजदूर संघ सीपीआईएम मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष मानिक दुबे ने कहा कि क्रशर और खदान बंद होने से मजदूरों की स्थिति दयनीय हो चुकी है. जिसके कारण पाकुड़ के बाज़ार की रौनक भी खत्म होने लगी है. कांग्रेस मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष अर्धेंदु शेखर गांगुली ने कहा कि पत्थर खदान एवं क्रशर बंद होने से जिले में व्यवसाय और बाजार की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है. कई बार मजदूरों के साथ धरना प्रदर्शन और आंदोलन किया गया, लेकिन पदाधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगती है. राजद के प्रदेश सचिव सुरेश अग्रवाल ने कहा कि पत्थर व्यवसाय बंद होने से पाकुड़ जिले की आर्थिक नाकेबंदी हो गई है. यह">https://lagatar.in/pakur-ddc-held-a-meeting-to-prepare-for-75th-independence-day-celebrations/">यह
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