300 साल से ज़्यादा पुरानी है काली तल्ला श्मशान काली की तांत्रिक पूजा
काली तल्ला मां श्मशान काली की पूजा तीन सौ से भी ज़्यादा वर्षों से तांत्रिक विधि व बंगाली पद्धति से की जा रही है. ऐसा मानना है की मां काली अमावस्या की रात्रि में आती हैं और दूसरे दिन सायं काल प्रस्थान कर जाती हैं. मां काली की पूजा राजा पृथ्वी चंद्र शाही के समय बांग्ला संवत 1222 से प्रारंभ हुई है. मां श्मशान काली की पूजा काली तल्ला से पूर्व में हिरणपुर प्रखंड के देवपुर गांव में हुआ करती थी. लेकिन जब से राजा पृथ्वी चंद्र शाही पाकुड़ आये और यहां पर राजबाड़ी की स्थापना की. तब से माता की पूजा पाकुड़ के राजा पाड़ा में होने लगी. लेकिन कालांतर में मां काली कालीतल्ला मोहल्ले में विराजमान है. उनकी पूजा-अर्चना बंगाली तांत्रिक विधि से की जाती है. मां की पूजा करने व मन्नत मांगने के लिए बिहार और बंगाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. अमावस्या के दिन बड़ी संख्या में मां की तंत्र विद्या के साधक भी यहां अपनी साधना सिद्ध करने पहुंचते हैं. [caption id="attachment_454036" align="alignnone" width="300"]alt="" width="300" height="225" /> काली पूजा के उपलक्ष्य पर लगा मेला[/caption]
जब सौ लोगों से भी नहीं उठी थी मां की प्रतिमा...
क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार व्यक्ति कृपा सिंधु बच्चन बताते हैं कि आज से 42 वर्ष पूर्व घनघोर बारिश हो रही थी और माता का विसर्जन करना था. माता को विसर्जन करने के पूर्व राजवाड़े स्थित स्थापित शिवलिंग की परिक्रमा करवाई जाती थी. उसके बाद नित्य काली मंदिर की परिक्रमा करते हुए राजापारा भ्रमण करते हुए काली भसान तालाब में विसर्जन किया जाता था. लेकिन मूसलाधार बारिश होने के कारण लोगों ने परिक्रमा छोड़कर सीधे काली भसान तालाब में विसर्जन का निर्णय लिया. विसर्जन के लिए कांधे पर जब माता की प्रतिमा को उठाई गई तो प्रतिमा उठी ही नहीं. सौ लोग मिलकर भी मां की प्रतिमा को टस से मस नहीं कर सके. उसके बाद राजा के वंशज भोला पांडे और तारा बाबू ने करबद्ध प्रार्थना कर विधिवत परिक्रमा व भ्रमण का संकल्प दोहराया तो महज आठ लोगों ने प्रतिमा को कांधे पर उठाकर परिक्रमा करते हुए प्रतिमा का विसर्जन किया. यह">https://lagatar.in/pakur-mp-and-minister-inaugurated-power-sub-station-in-jamreshpur-panchayat/">यहभी पढ़ें : पाकुड़ : सांसद व मंत्री ने जमरेशपुर पंचायत में किया पावर सब स्टेशन का उद्घाटन [wpse_comments_template]

Leave a Comment