Hussainabad (Palamu) : भारत के पहले राष्ट्रपति और महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 28 फरवरी पुण्यतिथि है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर उन्हें पूरा देश याद कर रहा है. हुसैनाबाद (पलामू) के राजकीय मध्य विद्यालय में भी उनकी पुण्यतिथि मनायी गयी. सभी ने देश के प्रथम राष्ट्रपति को श्रद्धा सुमन अर्पित की. स्कूल के प्रार्थना सत्र के बाद शिक्षकों ने बच्चों को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जीवनी के बारे में बताया गया. साथ ही बच्चों को उनके बताये गये मार्ग चिन्हों पर चलने की सीख दी गयी. बच्चों को विज्ञान दिवस के बारे में भी बताया गया. शिक्षक ने बताया कि कैसे हम सब फर्श से अर्श पर पहुंचे हैं और जो काल्पनिक लगता था, उसे मूर्त रूप दिया. यह विज्ञान की ही उपलब्धि है. मौके पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक कन्हैया प्र. के अलावा शिक्षकों में राजेश कुमार गुप्ता, जुबैर अंसारी, सुषमा पांडेय, आशा कुमारी, पूनम कुमारी, बाल संसद के प्रधानमंत्री सुमंत कुमार और सभी वर्ग प्रतिनिधी उपस्थित रहे.
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alt="" width="1280" height="576" /> राजेंद्र बाबू को देशरत्न के नाम से भी जाना जाता है. राजेंद्र बाबू का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई नामक गांव में हुआ था. उनके पूर्वज मूलरुप से कुआंगांव-अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले थे. राजेंद्र बाबू के पिता महादेव सहाय संस्कृत और फारसी के विद्वान थे. राजेंद्र बाबू जब 13 साल के थे, तो उनका विवाह राजवंशी देवी से हो गया था. भारतीय संविधान के लागू होने से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को उनकी बहन भगवती देवी का निधन हो गया. लेकिन वो भारतीय गणराज्य की स्थापना के बाद बहन के दाह संस्कार में शामिल होने गये थे. 26 जनवरी 1950 को डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. उन्होंने 14 मई 1962 तक राष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यभार संभाला. राजेंद्र बाबू बतौर राष्ट्रपति 150 दिन ट्रेन की यात्रा की थी और छोटे-छोटे स्टेशनों पर रुककर लोगों से मुलाकात की थी. राजेंद्र बाबू संविधान सभा के पहले अध्यक्ष भी रहे हैं. वे कुशाग्र बुद्धि के साथ सादगी के प्रतिमूर्त्ति थे. राजेंद्र बाबू के राजनीतिक गुरू महात्मा गांधी थे. स्वतंत्रता आंदोलन के संग्राम में राजेंद्र बाबू कई बार जेल भी गये. इनके व्यक्तित्व व कृतित्व भारतीय इतिहास में अमिट और अविस्मरणीय है. उक्त बातें शिक्षक वक्ताओं ने कही. [wpse_comments_template]
बच्चों को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जीवनी के बारे में बताया गया
alt="" width="1280" height="576" /> राजेंद्र बाबू को देशरत्न के नाम से भी जाना जाता है. राजेंद्र बाबू का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई नामक गांव में हुआ था. उनके पूर्वज मूलरुप से कुआंगांव-अमोढ़ा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले थे. राजेंद्र बाबू के पिता महादेव सहाय संस्कृत और फारसी के विद्वान थे. राजेंद्र बाबू जब 13 साल के थे, तो उनका विवाह राजवंशी देवी से हो गया था. भारतीय संविधान के लागू होने से ठीक एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को उनकी बहन भगवती देवी का निधन हो गया. लेकिन वो भारतीय गणराज्य की स्थापना के बाद बहन के दाह संस्कार में शामिल होने गये थे. 26 जनवरी 1950 को डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने. उन्होंने 14 मई 1962 तक राष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यभार संभाला. राजेंद्र बाबू बतौर राष्ट्रपति 150 दिन ट्रेन की यात्रा की थी और छोटे-छोटे स्टेशनों पर रुककर लोगों से मुलाकात की थी. राजेंद्र बाबू संविधान सभा के पहले अध्यक्ष भी रहे हैं. वे कुशाग्र बुद्धि के साथ सादगी के प्रतिमूर्त्ति थे. राजेंद्र बाबू के राजनीतिक गुरू महात्मा गांधी थे. स्वतंत्रता आंदोलन के संग्राम में राजेंद्र बाबू कई बार जेल भी गये. इनके व्यक्तित्व व कृतित्व भारतीय इतिहास में अमिट और अविस्मरणीय है. उक्त बातें शिक्षक वक्ताओं ने कही. [wpse_comments_template]
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