Sanjeet Yadav Palamu : पारा चिकित्साकर्मियों के हड़ताल का असर पलामू के एमएमसीएच में दिखने लगा है. यहां काम करने वाले डॉक्टर और कर्मी पर काम का बोझ बढ़ गया है. इन्हें 12-15 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है. लगातार और शुभम संदेश की टीम जब अनुबंध स्वास्थ्यकर्मियों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल की स्थिति क्या है जानने पहुंची तो एमएमसीएच के परमानेंट और आउटसोर्सिंग चिकित्सा कर्मियों का दर्द छलक गया. कुछ चिकित्सा कर्मियों ने कहा कि क्या कहें हम लोग भी तो एक इंसान ही है ना, कैसे 15-15 घंटा ड्यूटी करें. कभी-कभी तो मन करता है कि काम छोड़ दें, लेकिन क्या करें नौकरी है तो करना ही पड़ेगी. इसे भी पढ़ें : बिहार">https://lagatar.in/bihar-chief-minister-nitish-kumar-announces-accepts-to-die-but-will-not-go-with-bjp/">बिहार
के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ऐलान, मर जाना कबूल, लेकिन बीजेपी के साथ जाना नहीं आगे कहा कि एमएमसीएच पलामू प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल है. इस अस्पताल में सबसे ज्यादा प्रसव के लिए महिलाएं आती है. रोज यहां 50 से 100 महिलाएं आती थी, लेकिन चिकित्सार्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण महिलाएं प्रसव के लिए कम आ रही है. बताया कि प्रसव वार्ड में 8 चिकित्सा कर्मी रहते थे. लेकिन हम लोग केवल दो ही हैं. आखिर कैसे इतना बड़ा एमएमसीएस के महिला वार्ड को दो चिकित्साकर्मी संभालेंगे. मैन पावर की कमी के कारण कई महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता. चिकित्सक कर्मियों ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड में अनुबंध 6 चिकित्साकर्मी थे, एनआईसीयू वार्ड में अनुबंध 6 चिकित्साकर्मी और सर्जिकल वार्ड में अनुबंध 3 चिकित्साकर्मी में थे. सभी के हड़ताल पर जाने के कारण आउटसोर्सिंग और जूनियर डॉक्टरों के सहारे अस्पताल चल रहा है. जिसके कारण मरीजों को भी इलाज कराने में परेशानी हो रही है. बता दें कि अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों के नहीं रहने के कारण मरीज अब रिम्स और बड़े अस्पतालों का रूख कर रहे हैं. वहीं रिम्स और सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से यहां भी परेशानी हो रही है. मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है. अनुबंधकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है. इससे अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है.
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के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ऐलान, मर जाना कबूल, लेकिन बीजेपी के साथ जाना नहीं आगे कहा कि एमएमसीएच पलामू प्रमंडल का सबसे बड़ा अस्पताल है. इस अस्पताल में सबसे ज्यादा प्रसव के लिए महिलाएं आती है. रोज यहां 50 से 100 महिलाएं आती थी, लेकिन चिकित्सार्मियों के हड़ताल पर जाने के कारण महिलाएं प्रसव के लिए कम आ रही है. बताया कि प्रसव वार्ड में 8 चिकित्सा कर्मी रहते थे. लेकिन हम लोग केवल दो ही हैं. आखिर कैसे इतना बड़ा एमएमसीएस के महिला वार्ड को दो चिकित्साकर्मी संभालेंगे. मैन पावर की कमी के कारण कई महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता. चिकित्सक कर्मियों ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड में अनुबंध 6 चिकित्साकर्मी थे, एनआईसीयू वार्ड में अनुबंध 6 चिकित्साकर्मी और सर्जिकल वार्ड में अनुबंध 3 चिकित्साकर्मी में थे. सभी के हड़ताल पर जाने के कारण आउटसोर्सिंग और जूनियर डॉक्टरों के सहारे अस्पताल चल रहा है. जिसके कारण मरीजों को भी इलाज कराने में परेशानी हो रही है. बता दें कि अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों के नहीं रहने के कारण मरीज अब रिम्स और बड़े अस्पतालों का रूख कर रहे हैं. वहीं रिम्स और सदर अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से यहां भी परेशानी हो रही है. मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है. अनुबंधकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल स्थित डायग्नोस्टिक सेंटर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही है. इससे अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है.
हड़ताल से बढ़ गया काम का बोझ, चरमरा सकती है व्यवस्था : डीके सिंंह
इस संबंध में एमएमसीएच के सुपरीटेंडेंट डीके सिंह ने बताया कि हड़ताल का असर जरूर पड़ा है. स्वास्थ्य सेवा चरमरा गई है, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है. आउटसोर्सिंग स्टाफ से कामकाज लिया जा रहा है. हड़ताल के कारण अस्पताल और आउटसोर्सिंग कर्मियों पर कार्य भार बढ़ गया है. हड़ताल लंबी खींचने पर स्वास्थ्य सेवा चरमराएगी. किसी भी व्यक्ति के काम करने की सीमा है. लगातार काम करना बोझिल हो जाता है. इसे भी पढ़ें : पाकिस्तान">https://lagatar.in/pakistan-attack-on-a-mosque-in-peshawar-20-killed-more-than-90-injured/">पाकिस्तान: पेशावर में स्थित एक मस्जिद पर हमला, 20 की मौत, 90 से ज्यादा घायल [wpse_comments_template]
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