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पलामू : यूरिया की किल्लत से जूझ रहे किसान, पर जमाखोर हो रहे मालामाल!

Palamu :  पलामू जिले में यूरिया की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ यूरिया की किल्लत होने से खेतों में खाद की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है. वहीं दूसरी तरफ जमाखोर धड़ल्ले से यूरिया की कालाबाजारी कर मालामाल हो रहे हैं. 

 

इस बार यूरिया की मांग ज्यादा

बताते चलें कि पलामू समेत पूरे झारखंड में इस वर्ष अच्छी वर्षा हुई है. ऐसे में किसानों ने बीते वर्षों की तुलना में काफी अधिक मात्रा में धान की खेती की है. इस वजह से इस साल अतिरिक्त यूरिया की जरूरत पड़ रही है, जिससे यूरिया की मांग कई गुना बढ़ गई है.

 

कार्रवाई के बावजूद कालाबाजारी जारी

हैरत की बात यह है कि एक तरफ जहां बाजार में यूरिया की कमी है. वहीं दूसरी तरफ विभिन्न स्थानों से बड़ी मात्रा में यूरिया बरामद किया जा रहा है. यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला कृषि पदाधिकारी लगातार दुकानों में छापेमारी कर रहे हैं. इसके बावजूद कई जगहों से अधिक दाम पर यूरिया बेचने की खबरें आ रही हैं.

 

मांग की तुलना में एक तिहाई आपूर्ति

बता दें कि  डाल्टनगंज में बीते गुरुवार को 2670.84 मीट्रिक टन यूरिया की खेप पहुंची, लेकिन पलामू जिले को सिर्फ 850 मीट्रिक टन ही मिला, जो मांग का सिर्फ एक तिहाई है. जिला कृषि विभाग का कहना है कि किसानों की मांग को पूरा करने के लिए कम से कम तीन गुना ज्यादा यूरिया की जरूरत है. 

 

यूरिया की किल्लत, कालाबाजारी चरम पर

सरकार ने यूरिया की कीमत प्रति बोरी 266 रुपये तय की है. जबकि बाजार में इसे 350 से 800 रुपये में बेचा जा रहा है. किसानों को मजबूरी में ऊंचे दाम पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है.

 

1 किलो की जगह अब 4 किलो की जरूरत

किसानों का कहना है कि पहले एक कट्ठा खेत में एक किलो यूरिया पर्याप्त होता था. लेकिन अब प्रति कट्ठा चार किलो तक यूरिया की जरूरत पड़ती है. लेकिन आपूर्ति अब भी एक दशक पुरानी मांग के आधार पर हो रही है, जिससे हर साल किसानों को यूरिया की किल्लत का सामना करना पड़ता है.

 

सरकारी लागत पर यूरिया बेचने का विरोध

हुसैनाबाद अनुमंडल खाद्य विक्रेता संघ का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से खाद मंगवाने पर प्रति बोरी लागत 320 से 330 रुपये पड़ रही है. ऐसे में सरकारी दर पर यूरिया बेचना घाटे का सौदा है.  इससे वैध विक्रेता पीछे हट रहे हैं और अवैध बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है.

 

जनप्रतिनिधि भी कर चुके हैं हस्तक्षेप

बता दें कि डाल्टनगंज विधायक आलोक चौरसिया, पांकी विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता और पूर्व विधायक कमलेश सिंह ने भी किसानों को उचित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग कर चुके हैं. 

 

कार्रवाई जारी रहेगी : कृषि पदाधिकारी

जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार ने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए आपूर्ति बढ़ाई जा रही है. सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों तक सुलभता से यूरिया पहुंचे. कहा कि यूरिया की किल्लत से निपटने के लिए नैनो यूरिया के प्रयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है.

 

उन्होंने कहा कि अब तक कालाबाजारी करने वाले कई बीज भंडार को सील किया गया है और आगे भी शिकायत के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी.

 

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