Sanjeet Yadav Palamu : बूढ़ा पहाड़ में आईईडी ब्लास्ट और गोलियां की तड़तड़ाहट से लोग सुबह कि किरणें और शाम की लाली देखना भूल गए थे. गोलियों की तड़तड़ाहट और आईडी ब्लास्ट की आवाजे सुनकर लोग घर में ही डर से छुपे रहते थे. बच्चे पढ़ने के बजाय गोलियां की तड़तड़ाहट की गिनती गिना करते थे. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस के कारण बूढ़ा पहाड़ से नक्सली भाग खड़े हुए. बूढ़ा पहाड़ के विभिन्न गांवों में लोग अब सुबह के किरणें और शाम की लाली दोनो देखना शुरू कर दिया है. बच्चे भी गोलियों की तड़तड़ाहट की गिनती छोड़ ABCD तो कोई क ख ग घ तो कोई 1 से 100 तक की गिनती कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें-रांची">https://lagatar.in/ranchi-commissioner-and-dig-took-stock-of-durga-puja-pandal/">रांची
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सीआरपीएफ ग्रामीणों को दे रहा हौसला
बच्चे सीआरपीएफ की 172वीं बटालियन के पास पहुंच कर पढ़ाई करवा रहा है. सीआरपीएफ की ओर से बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा के साथ खेलकूद और भोजन की भी व्यवस्था की गई है. इन्हें बेसिक शिक्षा देने का काम सीआरपीफ के जवान कर रहे हैं. जो सुविधाएं एक प्राइवेट स्कूल में होती हैं वैसी ही सुविधाओं के साथ यहां बच्चे पढ़ाई के साथ खेल में भी रुचि ले रहे है. सीआरपीफ के इस कार्य की सराहना बच्चों के माता-पिता भी खूब करते हैं. माओवादी बच्चों का इस्तेमाल करते थे, लेकिन समय ऐसा बदला कि यही बच्चे आज पाठशाला में पढ़ाई कर रहे हैं, जो कभी बंदूक उठाते थे. यह एक अच्छी पहल है.alt="" width="600" height="300" />
60 किमी के दायरे में फैला है बूढ़ा पहाड इलाका
बता दे कि कभी नक्सलियों के गढ़ रहे बूढ़ा पहाड़ झारखंड के गढ़वा, लातेहार और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ सीमा में करीब 60 किमी तक फैला है. 90 के दशक के बाद से कुछ समय पहले तक यह नक्सलियों का सबसे सेफ जोन माना जाता था. लंबी लड़ाई के बाद सुरक्षाबलों और झारखंड पुलिस ने इसे नक्सलियों के कब्जे से मुक्त कराया. इसके बाद झारखंड सरकार की ओर से लगभग 100 करोड़ की लागत से बूढ़ा पहाड़ विकास परियोजना के तहत कई योजनाएं शुरू की गई.कई विकास योजनाएं चल रही
बूढ़ा पहाड़ विकास परियोजना के तहत ग्रामीणों को मिनी ट्रैक्टर, पंपसेट, बीज, कृषि उपकरण और राशन किट उपलब्ध कराये जा रहे हैं. इसके अलावा तालाबों का जीर्णोद्वार, तालाब निर्माण, गाय और बकरी पालन समेत 100 से अधिक योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा हैं. बूढ़ा पहाड़ इलाके में बसे विभिन्न गांवों में अब बाजार सजने लगे हैं. सुरक्षाबलों की मौजूदगी के कारण माओवादियों का खौफ खत्म होने लगा है. सुरक्षाकर्मी भी बुनियादी जरूरतों के सामान की खरीदारी गांव के छोटे-छोटे दुकानों से करने लगे हैं. सामानों की बिक्री बढ़ने से गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी है. जबकि सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने के कारण खेती-किसान और पशुपालन की मदद से भी ग्रामीण आत्मनिर्भर बन रहे हैं. वहीं तालाब, डोभा और सड़क निर्माण समेत अन्य योजनाओं के कारण स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है. जिसके कारण पूरे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं.alt="" width="600" height="300" /> इसे भी पढ़ें-आदित्यपुर">https://lagatar.in/news-from-adityapur-before-diwali-government-should-give-bonus-and-dearness-allowance-to-employees-mahasangh/">आदित्यपुर
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मूलभूत सुविधाओं पर दिया जा रहा ध्यान
योजना के तहत बूढ़ा पहाड़ के गांवों तक पहुंचने के लिए कई पुलिया का निर्माण किया जा रहा है. कच्ची सड़क की भी मरम्मत की गई. अब ग्रामीण आसानी से साइकिल अथवा मोटरसाइकिल से आवागमन करने लगे है. जबकि सड़क पहले से बेहतर होने के कारण ग्रामीण दुकानदार जरूरत के सामान भाड़े के वाहन से गांव तक ले जाने लगे हैं. लोग को सुरक्षा देने के लिए राज्य पुलिस और सीआरपीएफ ने जगह-जगह पर कैंप स्थापित किया है. इस कैंप में कई जवान तैनात हैं.आईजी राजकुमार लकड़ा ने बढ़ाया हौसला
ग्रामीणों की समस्या और नक्सल अभियान में तैनात जवानों की हौसला बढ़ाने के लिए पलामू जोन के आईजी राजकुमार लकड़ा ने गुरुवार को बूढापहाड़ और इलाके में ज्वाइंट टास्क फोर्स का जायजा लिया. इस दौरान गढ़वा एसपी दीपक कुमार पांडेय, अभियान एसपी विवेकानंद और सीआरपीएफ 172 बटालियन के अमरेंद्र भी मौजूद थे. सबसे पहले आईजी बूढापहाड़ गए, वहां उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की. कैंप में पढ़ रहे हैं बच्चे को मिठाई और चॉकलेट अपने हाथों से बांटे. सभी बच्चों से नाम पूछे और उसके बाद आईजी खुद बच्चे को पढ़ाने लगे. सभी बच्चे के साथ बैठकर फोटो भी खिंचवाया. इस दौरान सरकारी काम में बाधा ना हो और लोगों बोलने के बाद बूढ़ापहाड़ के इलाके में नया थाना खोलने की बात कही. बूढ़ापहाड़ से सटे बड़गड़ के इलाके में यह थाना खोले जाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.alt="" width="600" height="340" />
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