Medininagar : मेदिनीनगर की पूर्व मेयर अरुणा शंकर अपने कार्यकाल में नगर निगम क्षेत्र का व्यापक विकास कराने का दावा करते फिर रही हैं. इस संबंध में उन्होंने एक पत्रिका भी जारी की है, जिसमें निगम क्षेत्र के वार्डों में कराए गए कार्यों का उल्लेख है. पत्रिका में कई तालाबों के सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार की बात भी कही गई है.
लेकिन इन दावों के बीच नवाटोली तालाब, जिसे सैंडर्स बांध के नाम से भी जाना जाता है, की स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह तालाब पहले करीब 8.50 एकड़ में फैला था, जो अब सिमटकर मात्र तीन एकड़ में रह गया है. चारों ओर से तालाब पर अतिक्रमण कर लिया गया है, लेकिन अब तक चुने गए नगर निकाय प्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
स्थानीय निवासी शर्मिला वर्मा ने बताया कि इस तालाब का जीर्णोद्धार 90 के दशक में तत्कालीन विधायक इंदर सिंह नामधारी ने कराया था. उस समय न सिर्फ तालाब का सौंदर्यीकरण किया गया था, बल्कि लोगों के लिए फूड कोर्ट व नौका विहार की भी व्यवस्था थी. इसके बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने तालाब की सुध नहीं ली.
राजेश कुमार ने बताया कि पहले तालाब में पर्याप्त पानी रहने के कारण आसपास के मोहल्लों में 30 फीट तक जलस्तर बना रहता था, लेकिन बीते एक दशक में जलस्तर काफी नीचे चला गया है. निगम व पूर्व में चुने गए नगर परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मेयर व डिप्टी मेयर ने तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर कोई पहल नहीं की.
हैरानी की बात यह है कि यह तालाब पूर्व मेयर अरुणा शंकर के घर से सटा हुआ है. इसके बावजूद तालाब की बदहाली ‘दीपक तले अंधेरा’ की कहावत चरितार्थ कर रही है. आसपास के घरों व मोहल्ले की नालियों का गंदा पानी तालाब में ही गिरता है, जिससे इसका पानी बदबूदार हो गया है. तालाब जलकुंभियों से भर चुका है.
मछली का व्यापार करने वाले मुकेश चौधरी ने कहा कि तालाब से सटे क्षेत्र पर रसूखदारों ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया है. इसी तालाब में पलामू जिले के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर बंधुओं की प्रतिमा भी स्थापित है, जिन्हें गंदगी, बदबूदार पानी और जलकुंभियों से घिरे तालाब के बीच रहना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नवाटोली तालाब का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए और वैज्ञानिक तरीके से इसका जीर्णोद्धार कराया जाए तो यह तालाब एक बार फिर इलाके की पहचान बन सकता है. लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम, जिला प्रशासन व नए जनप्रतिनिधि इस ऐतिहासिक तालाब की बदहाली पर संज्ञान लेंगे और सौंदर्यीकरण के जरिए इसे फिर से स्वच्छ, पर्यटन व भू-जल संरक्षण का केंद्र बनाएंगे.
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