Ranchi : आर्चबिशप विसेंट आइंद ने आज रविवार को कहा कि आदिवासी संस्कृति में लोग हाथ में हाथ डाल कर मांदर, छांझ,और ताली बजाकर और बेतरा लेकर नाचते हैं. यह आदिवासी संस्कृति की झलक है. इसमें खुशी मनाया जाना सामुदायिकता का प्रतीक है.एकता का प्रतीक है.सामुदायिकता को सबसे पहला स्थान, उच्च महत्व देना चाहिए. एक-एकव्यक्ति को सामुदायिक सेवा में तैयार रहना है.ये खासियत है कि नगाड़े की आवाज सुनकर अखड़ा नाचता है.
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class="aligncenter wp-image-986175 size-full" src="https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/12/ppp.jpg"
alt="" width="600" height="400" /> रविवार को पुरुलिया रोड स्थित संत जोसेफ क्लब में पल्ली सांस्कृतिक समिति के बैनर तले पल्ली दिवस मनाया गया. आर्चबिशप विसेंट आइंद यहां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत फादर प्रफुल्ल टोप्पो की अगुवाई में परमेश्वर की आराधना से हुई, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के अलावा पल्ली पुरोहित आनंद डेविड खलखो, फादर जार्ज, फादर दीपक बाडा, फादर नीलम तीडु, फादर नीरज कंडुलना,फादर रोबिन प्रफुल्ल टोप्पो, कैथोलिक सभा अध्यक्ष अजय कच्छप, केथोलिक महिला संघ की अध्यक्ष फ्रांसिस्का खलखो,पल्ली सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष पीटर मिंज,अभिषेक सागर लकड़ा समेत अन्य शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कहा कि सामुदायिकता में ही सहभागिता है. एक दूसरे से साझीदारी है. इसी से पल्ली आगे बढ़ा है. इसी रूप में पल्ली बना रहेगा, तो हर समय पल्ली आदर्श बना रहेगा. जिससे पवित्रता, अपनापन,सामुदायिकता, साझेदारी का भाव हमेशा बना रहेगा. कहा कि पल्ली दिवस एक सामुदायिक दिवस है. यह सामुदायिक उद्देश्य को पूरा करता है.
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alt="" width="600" height="400" /> रविवार को पुरुलिया रोड स्थित संत जोसेफ क्लब में पल्ली सांस्कृतिक समिति के बैनर तले पल्ली दिवस मनाया गया. आर्चबिशप विसेंट आइंद यहां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत फादर प्रफुल्ल टोप्पो की अगुवाई में परमेश्वर की आराधना से हुई, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के अलावा पल्ली पुरोहित आनंद डेविड खलखो, फादर जार्ज, फादर दीपक बाडा, फादर नीलम तीडु, फादर नीरज कंडुलना,फादर रोबिन प्रफुल्ल टोप्पो, कैथोलिक सभा अध्यक्ष अजय कच्छप, केथोलिक महिला संघ की अध्यक्ष फ्रांसिस्का खलखो,पल्ली सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष पीटर मिंज,अभिषेक सागर लकड़ा समेत अन्य शामिल हुए. मुख्य अतिथि ने कहा कि सामुदायिकता में ही सहभागिता है. एक दूसरे से साझीदारी है. इसी से पल्ली आगे बढ़ा है. इसी रूप में पल्ली बना रहेगा, तो हर समय पल्ली आदर्श बना रहेगा. जिससे पवित्रता, अपनापन,सामुदायिकता, साझेदारी का भाव हमेशा बना रहेगा. कहा कि पल्ली दिवस एक सामुदायिक दिवस है. यह सामुदायिक उद्देश्य को पूरा करता है.
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