- 48 नगर निकायों में 6979 प्रत्याशी मैदान में
- दल समर्थित उम्मीदवारों से गरमाया चुनावी माहौल
Ranchi : झारखंड के नौ नगर निगम समेत कुल 48 नगर निकायों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही राज्य की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है. भले ही निकाय चुनाव दलगत चुनाव चिह्न पर नहीं हो रहे हों, परंतु राजनीतिक दल समर्थित प्रत्याशियों की मौजूदगी ने चुनाव को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है.
राज्यभर में विभिन्न दलों ने अपने समर्थित प्रत्याशियों को जिताने के लिए अनौपचारिक संगठनात्मक ढांचा सक्रिय कर दिया है. पार्टी नेता, विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि और संगठनात्मक पदाधिकारी पर्दे के पीछे से चुनावी रणनीति संभालते नजर आ रहे हैं.
नामांकन के आंकड़ों में दिखा दलों का शक्ति संतुलन
जानकारी के अनुसार, महापौर व वार्ड पार्षद के लिए कुल 6,979 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किया है, जिनमें 3,462 महिलाएं हैं. महापौर व अध्यक्ष पद के लिए 674 प्रत्याशी, जबकि वार्ड पार्षद पद के लिए 6,305 उम्मीदवार मैदान में हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बड़ी संख्या में नामांकन इस बात का संकेत है कि हर प्रमुख दल शहरी निकायों में अपनी ताकत आजमाना चाहता है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बढ़त बनाई जा सके.
अंतिम दिन दिखा खुला शक्ति प्रदर्शन
नामांकन के अंतिम दिन बुधवार को 48 नगर निकायों में 2,588 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया. इस दौरान कई शहरों में जुलूस, नारेबाजी और समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली. अंतिम दिन महापौर व अध्यक्ष पद के लिए 275, जबकि वार्ड पार्षद पद के लिए 2,313 प्रत्याशियों ने नामांकन किया.
राजनीतिक दलों ने भले ही आधिकारिक रूप से चुनाव से दूरी बनाए रखने की बात कही हो, लेकिन प्रत्याशियों के साथ दिख रही पार्टी झंडे, रंग और नेताओं की मौजूदगी ने दावों की पोल खोल दी है.
महिला उम्मीदवार बनीं राजनीतिक रणनीति का हिस्सा
इस बार महिला प्रत्याशियों की संख्या ने भी दलों की रणनीति को नया आयाम दिया है. महापौर व अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वालों में करीब 42 प्रतिशत महिलाएं, जबकि वार्ड पार्षद पद पर 50.42 प्रतिशत महिलाएं मैदान में हैं. दलों ने सामाजिक समीकरण और वोट बैंक साधने के लिए महिला चेहरों को खुलकर आगे बढ़ाया है.
टिकट नहीं, समर्थन की लड़ाई तेज
महापौर व अध्यक्ष पद के लिए कुल 674 नामांकनों में 283 महिलाओं ने पर्चा भरा है. जबकि वार्ड पार्षद के पद के लिए हुए कुल 6,305 नामांकनों में से 3,179 महिलाएं हैं. चूंकि चुनाव चिह्न निर्दलीय है, ऐसे में असली मुकाबला अब पार्टी समर्थन, संगठनात्मक पकड़ और संसाधनों पर टिका होगा.
जांच, वापसी और फिर प्रतीकात्मक जंग
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी. 6 फरवरी तक नाम वापसी का अवसर दिया गया है. इसके बाद 7 फरवरी को चुनाव चिह्नों का आवंटन होगा, जिसके साथ ही चुनाव प्रचार औपचारिक रूप से रफ्तार पकड़ लेगा.
शहरी सत्ता से विधानसभा तक की तैयारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह निकाय चुनाव केवल नगर सरकार बनाने की कवायद नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल है. भले ही विधानसभा चुनाव में अभी काफी देर है. नगर निगमों और परिषदों में बढ़त हासिल कर दल शहरी मतदाताओं के मूड को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.


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