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धुर्वा, गेतलसूद और पतरातू डैम में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनने का रास्ता साफ, हाई कोर्ट से टेंडर विवाद खारिज

Ranchi. अब राजधानी रांची के लोग 3 डैम में 5 फ्लोटिंग रेस्टूरेंट का मजा उठाएंगे. झारखंड हाई कोर्ट ने रांची एवं उसके आसपास के डैम में फ्लोटिंग रेस्टूरेंट बनाने से जुड़े टेंडर विवाद को खारिज कर दिया है. रांची एवं उसके आसपास के डैम में 5 फ्लोटिंग रेस्टूरेंट बनाने को लेकर दास एंड कुमार कंपनी को टेंडर दिया गया है. जिसे शिरोमणि इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट ने इस याचिका खारिज कर दिया.
 
फ्लोटिंग रेस्टूरेंट की सांकेतिक तस्वीर.
  • धुर्वा, गेतलसूद और पतरातू डैम में बनना है 5 फ्लोटिंग रेस्टोरेंट 

Ranchi: अब राजधानी रांची के लोग 3 डैम में 5 फ्लोटिंग रेस्टूरेंट का मजा उठाएंगे. झारखंड हाई कोर्ट ने रांची एवं उसके आसपास के डैम में फ्लोटिंग रेस्टूरेंट बनाने से जुड़े टेंडर विवाद को खारिज कर दिया है. रांची एवं उसके आसपास के डैम में 5 फ्लोटिंग रेस्टूरेंट बनाने को लेकर दास एंड कुमार कंपनी को टेंडर दिया गया है. जिसे शिरोमणि इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट ने इस याचिका खारिज कर दिया. 

 

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धुर्वा डैम की फाइल फोटो.

 

जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार के टूरिज्म डिपार्टमेंट ने 5 फ्लोटिंग रेस्टूरेंट बनाने के लिए 28 नवंबर 2025 को टेंडर जारी किया था. इसमें पतरातू डैम और धुर्वा डैम में दो-दो और गेतलसूद डैम में एक फ्लोटिंग रेस्टोरेंट बनना है. वाराणसी की कंपनी दास एंड कुमार को इसका टेंडर मिला है. रेस्टूरेंट बनाने के काम मई माह में पूरा होना था. 

 

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पतरातू डैम की फाइल फोटो.

 

शिरोमणि इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने टेंडर में कुछ तकनीकी त्रुटि बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. मामले में हाई कोर्ट ने पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी ना हो जाए तब तक वह टेंडर पाने वाले कंपनी दास एंड कुमार को राशि आवंटित नहीं करें.

 

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गेतलसुद डैम की फाइल फोटो.

 

दरअसल, यह मामला झारखंड सरकार द्वारा फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के टेंडर से जुड़ा था. याचिकाकर्ता कंपनी ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी (Das & Kumars) की बोली को गलत तरीके से स्वीकार किया गया. मामले में कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया लेकिन चयन न होने के बाद आपत्ति उठाई.

कोर्ट ने इसे “बाद में चुनौती” मानते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी. मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ में हुई.

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