Search

रिम्स में मंगलवार से मरीजों को मिलेगी डायलिसीस सेवा की सुविधा समेत तीन खबरें

अस्पताल में भर्ती मरीजों को नहीं चुकाने होंगे शुल्क Ranchi : झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल में शुमार राजेंद्र विज्ञान संस्थान (रिम्स) में किडनी से संबंधित बीमारी के मरीजों को मंगलवार से डायलिसिस की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी. इस बाबत प्रबंधन ने रिम्स परिसर स्थित पेइंग वार्ड के पहले तल्ले पर 25 बेड का डायलिसिस यूनिट तैयार किया है. जहां एक साथ 75 मरीज का डायलिसिस किया जा सकेगा.

डायलिसिस सेवा के शुरू हो जाने से मरीजों को मिलेगी राहतः डॉ प्रज्ञा

नेफ्रोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ प्रज्ञा पंत ने कहा कि डायलिसिस यूनिट के शुरू हो जाने से मरीजों ने राहत की सांस ली है. जिला अस्पताल से भी किडनी की बीमारी से ग्रसित गंभीर अवस्था के मरीजों को इलाज के लिए रिम्स रेफर किया जाता है. ऐसे में डायलिसिस यूनिट की शुरुआत हो जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों को डायलिसिस के लिए पैसे का भुगतान नहीं करना पड़ेगा. मंगलवार से इंडोर में भर्ती मरीजों की डायलिसिस शुरू की जाएगी. बीपीएल कार्ड धारी, आयुष्मान कार्ड धारी और मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना से इलाजरत मरीज का डायलिसिस निशुल्क होगा. वैसे मरीज जिनके पास किसी भी तरह की बीमा की सुविधा उपलब्ध नहीं है उन्हें मात्र 1341 रुपए के भुगतान के बाद डायलिसिस सेवा प्रदान की जाएगी.

सेंट्रल लैब का मंगलवार को होगा उद्धाटन, 24 घंटे होगी जांच

Ranchi : रिम्स में मंगलवार को सेंट्रल लैब जांच केंद्र का उद्घाटन किया जाएगा. ट्रॉमा सेंटर स्थित इस सेंट्रल लैब में मरीजों को चौबीस घंटे जांच की सेवा मिलेगी. इसके शुरू हो जाने से बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिलेगा. बता दें कि फिलहाल मरीजों को एलएफटी, आरएफटी और सीबीसी जैसे जांच के लिए कई बार परेशान होना पड़ता है. रिएजेंट के अभाव में यह परेशानी होती है. अब इसके शुरू हो जाने से मरीजों को जांच के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. साथ ही 24 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट प्राप्त हो सकेगी. फिलहाल रिम्स में सीबीसी जैसी रिपोर्ट के लिए भी मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है.

----------------------------------

विश्व एनेस्थीसिया दिवस : रिम्स के चिकित्सकों ने दी सीपीआर की जानकारी

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/10/14-11.jpg"

alt="" width="600" height="400" />
  • मरीजों को सकुशल बेहोश कर होश में लाने की प्रक्रिया है एनेस्थीसिया
Ranchi : लगभग 177 साल पहले मैसाच्यूसेट्स अस्पताल बोस्टन में डब्ल्यूटीजी मार्टिन ने एनेस्थेटिक के रूप में ईथर के पहले आधिकारिक सफल प्रदर्शन की खोज की. उसके बाद से ही 16 अक्टूबर को विश्व एनेस्थीसिया दिवस मनाया जाने लगा. इसी कड़ी में राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान रिम्स के एनेस्थीसिया विभाग के चिकित्सकों ने मरीज के परिजनों को सीपीआर देने की प्रक्रिया की जानकारी दी. विभाग के एचओडी डॉ लाधू लकड़ा ने कहा कि हार्ट अटैक के 10 में 7 मरीजों को समय पर सीपीआर मिल जाए तो मरीज की जान बच सकती है. वहीं पीजी के छात्रों के बीच क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. बता दें कि पिछले 150 वर्षों में एनेस्थीसिया जबरदस्त ऊंचाइयों तक विकसित हुआ है.

दर्द निवारक देखभाल के लिए एनेस्थीसिया जरूरी

रांची सोसाइटी ऑफ एनएस्थीसियोलॉजिस्ट के सचिव प्रोफ़ेसर डॉ शियो प्रिये ने कहा कि एनेस्थीसिया देना अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर है. विभिन्न प्रकार के ब्लॉक तकनीक न केवल साधारण मामलों बल्कि ओपन हार्ट सर्जरी जैसे उच्च जोखिम वाले मामलों का संचालन करने में भी सक्षम बनाती है. हम न केवल सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया दे रहे हैं, बल्कि हम दर्द निवारक देखभाल, ट्रॉमा केयर और गहन चिकित्सा यूनिट में भी काम कर रहे हैं. हर शल्य क्रिया अपने आप में किसी ना किसी प्रकार से शारीरिक क्षति से संबंधित है. यह याद रखना जरूरी है कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट न केवल आपको बेहोश करता है, बल्कि आपको सकुशल होश में भी लाता है. इसे भी पढ़ें – डॉ.">https://lagatar.in/dr-hazra-received-world-class-acupuncture-spine-specialist-award-welcomed-at-the-airport/">डॉ.

हाजरा को मिला वर्ल्ड क्लास एक्यूपंक्चर स्पाईन स्पेशलिस्ट अवार्ड, एयरपोर्ट पर किया गया स्वागत
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp