Patamda/Bodam : पटमदा के किसानों के धान की फसल काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. एक बार उगाए गए धान के फसल से बने चावल को सालों भर खाते हैं. कई किसान तो अधिक मात्रा में उपजे धान को बेचकर घर के अन्य कार्य में खर्च करते हैं. सरकार द्वारा प्रखंड के कई स्थानों पर धान खरीद केंद्र खोले गए लेकिन व्यवस्था के अभाव में अभी भी लगातार खरीदारी नहीं हो पा रही है. क्षेत्र के किसान आज भी बिचौलियों को धान बेचने को विवश हैं. जहां सरकार ने धान क्रय का मूल्य 2050 रुपए प्रति क्विंटल रखा है. वहीं बंगाल से आने वाले धान व्यापारी एक हजार से 1200 रुपए तक में धान की खरीदारी घर पहुंचकर कर रहे हैं. इसे भी पढ़ें : तेजी">https://lagatar.in/the-stock-market-opened-with-a-boom-sensex-strengthened-by-315-points-buying-in-all-sectors/">तेजी
के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 315 अंक मजबूत, सभी सेक्टर में लिवाली पागदा गांव के किसान जीतू महतो ने बताया कि प्रखंड में धान खरीद केंद्र खुला है, लेकिन गांव से काफी दूर है. वहां तक ले जाने में काफी अधिक खर्च करना पड़ता है इसलिए अधिकांश किसान बाहरी व्यापारियों को धान बेचने को विवश हैं. इस वर्ष बेमौसम बारिश होने के कारण अधिकांश किसानों की धान की फसल में अंकुर निकल आए हैं, जिसे लैम्पस में वाजिब दाम में बेचना मुश्किल हो रहा है. पुआल भी बारिश में नष्ट हो गए हैं. प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लिए अलग से लैम्पस स्थापित करने की मांग ग्रामीण कर रहे हैं. [wpse_comments_template]
पटमदा : खरीद केंद्र दूर होने के कारण किसान बिचौलियों को कम दाम में धान बेचने को मजबूर

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