Ashish Tagore Latehar : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद संवेदक मेसर्स मां गायत्री बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को टर्मिनेट कर दिया गया था. मगर महज एक सप्ताह बाद ही फिर से पुल निर्माण का काम उसी कंपनी को दे दिया गया. अब इस आदेश के बाद सवाल उठने लगे हैं. जिले के लोगों का कहना है कि अधिकारी काम लटकाने वाली कंपनी पर इतना मेहरबान क्यों है. बता दें कि मेसर्स मां गायत्री बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड लातेहार के औरंगा नदी पर पुल का निर्माण करा रही है. पिछले सात साल में भी पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है. पिछले महीने 14 फरवरी को सीएम हेमंत सोरेन लातेहार दौरे पर थे. वहां उनको जानकारी मिली कि औरंगा नदी पर पुल का निर्माण कार्य सात साल में भी पूरा नहीं हुआ है, तो उन्होंने संवेदक को टर्मिनेट करने का आदेश दिया. इसके आलोक में गत 16 फरवरी को उक्त संवेदक का एकरारनामा विखंडित कर उसे कार्य से टर्मिनेट कर दिया गया. इसके बाद 24.02.2023 को मुख्य अभियंता प्रमुख, झारखंड रांची की अध्यक्षता में गठित समिति ने समन्वयक विचारोपरांत कार्यहित में उक्त पुल निर्माण कार्य को आगामी जून 2023 तक पूरा करने की अनुमति प्रदान कर दी है.
सात सालों में महज 43 फीसदी कार्य ही हो पाया है
पथ निर्माण विभाग के द्वारा बनाये जा रहे लातेहार-सरयू-कोटाम पथ में लातेहार शहर के औरंगा नदी पर पुल निर्माण कार्य का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 27 नवंबर 2016 को किया था. रांची की गायत्री बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को यह कार्य आवंटित किया गया था. इस पुल की प्रशासनिक प्राक्कलन 610.929 लाख रुपये थी. जबकि इसका एकरारनामा 594.48 लाख रुपये में किया गया था. सात सालों में महज 43 फीसदी कार्य ही हो पाया है. दीगर बात यह है कि जब सात सालों में महज 43 फीसदी ही कार्य हो पाया है तो आगामी चार महीने में कैसे उक्त पुल का निर्माण कार्य पूरा किया जा सकता है. हालांकि संवेदक मेसर्स मां गायत्री बिल्डकॉन, रांची ने पथ निर्माण विभाग को एक शपथ पत्र सौंप कर जून 2023 तक इस कार्य को पूरा करने की बात कही है. जानकार बताते हैं कि उक्त संवेदक के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है और शायद ही वह अगले चार माह में उक्त पुल निर्माण कार्य का पूरा कर पायेगा. लेकिन ऊंची राजनीति पहुंच के कारण उसे पहले तो सात साल का समय दिया गया और अब टर्मिनेट होने के बाद भी जून माह तक का अवधि विस्तार दिया गया है. साल 2019 में टर्मिनेट के लिए किया गया था पत्राचार
जब पुल का निर्माण कार्य तीन वर्षों में भी पूरा नहीं हुआ तो पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने 19 नवंबर 2019 को अपने पत्रांक 1138 के माध्यम से मुख्य अभियंता कार्यालय को पत्र लिखकर पहली बार उक्त पुल निर्माण कराने वाली एजेंसी का एकरारनामा विखंडन (टर्मिनेट) करने के लिए पत्राचार किया था. इसके बाद उन्होंने नौ अक्टूबर 2021 तथा नौ फरवरी 2022 को मुख्य अभियंता कार्यालय को पुल निर्माण की अंतिम मापी लेकर संवेदक का एकरारनामा रद्द करने के लिए पत्राचार किया था. मालूम हो कि औरंगा नदी पर बन रहा यह पुल काफी महत्वपूर्ण है. इस पथ से सरयू, गारू, महुआडांड व नेतरहाट आसानी से पहुंचा जा सकता है. इस पथ से लातेहार से नेतरहाट की दूरी मात्र 80 किलोमीटर है. यहां ब्रिटिश जमाने में औरंगा नदी पर पुल बनाया गया था और इसी पुल से आवागमन होता है. लेकिन अब यह पुल जर्जर हो चुका है. पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है. इसी पुल के ठीक बगल में नया पुल बनाया जा रहा है, जिसे सात सालों में भी पूरा नहीं किया जा सका है. [wpse_comments_template]
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