Pirtand(Giridih): बीस तीर्थकरो की निर्वाणस्थली पारसनाथ पर्वत में 12 मई को जैन धर्म के 11वें तीर्थकर 1008 श्रेयांशनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक महोत्सव पूरे विधि-विधान व नियमानुसार मनाया गया. तीर्थकर श्रेयांशनाथ स्वामी राजा विष्णुराज की रानी विष्णुश्री के गर्भ से फाल्गुन कृष्ण पक्ष के ग्यारहवें तिथि में जन्म धारण किया था. प्रभुजी का टोंक की साफ सफाई कर विराजमान चरणपादुका का जल व पंचामृत से प्रक्षाल व अभीषेक कर शांति महाधारा का विधान कर परिदक्षणा देते हुए वंदन कर आरती उतारी गई. श्रद्धालुओं ने पूजा, अर्चना व यथा संभव त्याग का संकल्प कर पुण्य अर्जित किया. मौके पर दर्जनों श्रद़धालु उपस्थित थे. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=634712&action=edit">यह
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