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हजारीबाग के बाजार में ‘पियार’ के दीवाने हुए लोग

औषधि गुणों से हैं भरपूर, हृदय और पेट के लिए माना जाता है अमृत Gaurav Prakash Hazaribagh : जंगल में फलने वाला पियार इन दिनों हजारीबाग के बाजार में उतरा हुआ है. बाजार में पियार नामक फल प्यार की मिठास बन कर बिक रहा है. लोग खरीद कर इसका खट्टा-मीठा स्वाद खूब चख रहे हैं. कहा जाए तो इसका चटपटा स्वाद मुंह में पानी भर दे रहा है. छोटे आकार में काले रंग का जंगली फल भले ही देखने में आकर्षक नहीं हो, लेकिन स्वाद में सभी फलों को मात दे रहा है. इसे जंगल से तोड़कर बाजार तक लाने और फिर बेचने के लिए ग्रामीण महिलाओं को काफी मेहनत करनी पड़ती है. बेहद कोमल होने के कारण इसे लाना भी चुनौती से कम नहीं है. अगर थोड़ी मजबूती से बांध दी जाए, तो पूरा फल बर्बाद हो जाता है. ऐसे में गांव में रहने वाली महिलाएं-लड़कियां बड़ी सावधानी इसे बाजार लाती हैं. खास बात यह है कि पूरे साल भर में पियार महज 10 दिन ही बिकता है और इसके बाद इसका मौसम खत्म हो जाता है.

वात-पित्त नाशक माना जाता है पियार 

यह जंगली फल ग्रामीणों के आय के स्रोत के साथ सेहत के लिए संजीवनी है. पियार 600 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है. स्वादिष्ट फल के औषधि गुण भी हैं. वीर्य बढ़ाने के साथ-साथ यह हृदय को भी स्वस्थ रखता है. वात-पित्त नाशक भी माना जाता है. शारीरिक दुर्बलता में भी इसका उपयोग किया जाता है. इतना ही नहीं गैस के मरीजों के लिए यह रामबाण माना जाता है. अगर कब्जियत है, तो कोई एक-दो दाना खा ले, तो उसकी कब्जियत भी ठीक हो जाती है.

सेवन से शुगर लेवल रहता है ठीक, खून भी होता है साफ : मुरारी सिंह

पर्यावरणविद और जंगली फलों के जानकार मुरारी सिंह बताते हैं कि पियार पौष्टिक तो है ही, इसमें कई औषधि गुण भी है. शुगर यानी मधुमेह में यह फायदेमंद है. इसके सेवन से खून साफ होता है. इसके बीज को सुखाकर पाउडर बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से शुगर लेवल कम हो जाता है. इसकी पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पीने पर धातु रोग ठीक हो जाते हैं.

छत्तीसगढ़ में फल से अधिक बीज की कीमत

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में इसके बीज की कीमत फल से अधिक है. इसे वहां चिरौंजी कहा जाता है. छत्तीसगढ़ में इसका प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाया गया है. जाने-माने कृषि वैज्ञानिक बीके राघव भी कहते हैं कि जंगली फल पियार के कई गुण हैं. इस कारण इसका उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है.

झारखंड, ओडिशा, हिमाचल और मध्य प्रदेश के जंगलों में बहुतायत

क्षेत्रवार पियाल, पयाल और प्रियाल के नाम से प्रसिद्ध यह फल झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के जंगलों में पाया जाता है. पहले गांव के लोग इसे खाया करते थे. लेकिन धीरे-धीरे यह फल बाजार में भी आना शुरू हुआ. हजारीबाग में मुख्य रूप से डिस्ट्रिक्ट मोड़ पुराने समरणालय के पास गांव की महिलाएं इसे बेच रही हैं. यह 20 रुपए में लगभग 30 से 40 ग्राम बेचा जा रहा है. पियार बेचने वाली सुखवंती बताती हैं कि पियार नहीं मेरा प्यार है, जो हम जंगल से लाकर यहां बेच रहे हैं. इसे जो एक बार खाता है, वह फिर लेने के लिए पहुंचता है.

कच्चे में कसीला और पकने पर हो जाता है रसीला

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alt="जंगली फल केंद" width="1600" height="720" /> जंगली फल केंद[/caption] हजारीबाग में एक ओर जंगली फल केंद खूब बिक रहा है. पीले रंग का जंगली फल केंद खाने में मीठा और स्वादिष्ट होता है. कच्चे केंद कसीले होते हैं और जब यह पक जाता है तो रसीले हो जाते हैं. जानकारों की राय में इसके सेवन से पेचिश बीमारी ठीक हो जाती है. इसके बीज भी पौष्टिक होते हैं. सुखाकर सुबह-शाम पाउडर बनाकर खाने से कमजोरी भी दूर होती है. यह मकर कंद प्रजाति का फल है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/piyar_37-300x135.jpg"

alt="" width="300" height="135" /> https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/piyar-2_827-300x135.jpg"

alt="" width="300" height="135" /> इसे भी पढ़ें : शर्मनाक">https://lagatar.in/embarrassing-girls-head-shaved-in-palamu-first-paraded-in-the-whole-village-then-left-in-the-forest/">शर्मनाक

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