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धनबाद में समस्याओं से कराह रहे लोग, राजनीतिक दलों को कोई लेना-देना नहीं

Dhanbad : विगत दो माह से आम लोग पानी, बिजली, जलजमाव, नाले की सफाई, स्वास्थ्य सेवा जैसी मूलभूत चीजों के लिए तड़प रहे हैं. बिजली के लिए तो इन दिनों त्राहिमाम की स्थिति है. परंतु राजनीतिक पार्टियां इस भीषण गर्मी में भी कंबल ओढ़े पड़ी हैं. राज्य की प्रमुख विपक्षी भारतीय जनता पार्टी आंतरिक एजेंडे को अमली जामा पहनाने के काम में जुटी है. सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा  तो राजकाज में व्यस्त है ही, सहयोगी कांग्रेस पार्टी भी अपने अस्तित्व की चिंता में जन समस्याओं को भुला बैठी है. स्थिति बदतर होती जा रही है. लोगों को सूझ नहीं रहा कि फरियाद किससे करें.

   बैठकों में व्यस्त भाजपा

विगत 2 माह से भारतीय जनता पार्टी बूथ सशक्तीकरण, मन की बात, प्रदेश, जिला, अल्पसंख्यक, सामान्य महिला मोर्चा व किसान मोर्चा की बैठकों में व्यस्त है. सांसद ने खेल महोत्सव के जरिये जनता के बीच जाने का प्रयास किया था. मगर जन समस्याओं पर पार्टी का कोई रुख तय नहीं है. जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने शनिवार के बाद आंदोलन की हुंकार भरी थी.

  कार्यालय के लिए धरना पर कांग्रेस

कांग्रेसी अपने निजी कार्यालय खुलवाने के लिए विगत एक माह से लगातार धरना पर हैं. छह माह के अंदर कर्नाटक में जीत का जश्न मनाने के अलावा उन्होंने अन्य किसी जनसमस्या पर आवाज बुलंद नहीं की. अंदरखाने से खबर आ रही है कि जिलाध्यक्ष संतोष सिंह अपने ही लोगों से परेशान हैं.

   ढूंढे नहीं मिल रहे झामुमो कार्यकर्ता

विधानसभा चुनाव में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी झारखंड मुक्ति मोर्चा भी अपनी अंदरूनी लड़ाई को लेकर व्यस्त है. नई कमेटी के गठन के बाद अंदरूनी लड़ाई इतनी तीखी हो गयी है कि जन समस्याओं से किसी नेता को कोई मतलब नहीं रह गया है. पार्टी के नेता ढूंढे   नहीं मिल रहे हैं.

 समस्याओं से जूझ रही जनता

जिले के शहरी इलाकों में 10 से 12 घंटे, जबकि ग्रामीण इलाकों में 12 से 14 घंटे की बिजली कटौती हो रही है. आंधी-बारिश के समय बिजली कटौती और भी बढ़ जाती रही है. बारिश की वजह से नाली ओवरफ्लो हो रहा है. शहर में जलजमाव, घरों में पानी घुसने से आम जनता हलकान है. जलापूर्ति व्यवस्था की भी कमोबेश यही स्थिति है. ग्रामीण व झरिया-सिंदरी के इलाकों में पानी के लिए त्राहिमाम मचा है. मगर कोई पार्टी व नेता नगर निगम या बिजली विभाग के दरवाजे पर भी गुहार नहीं लगा रहा, आंदोलन तो दूर की बात है. [wpse_comments_template]

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