Ranchi News : JPSC द्वारा आयोजित 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्ति रद्द करने से संबंधित सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में आज शुरू हुई. हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के पक्ष रखने के बाद सरकार ने भी अपनी बात रखी.
सरकार ने कहा-परीक्षा में अनियमितता हुई है
सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि परीक्षा में सिस्टमैटिक अनियमितता हुई है. अनुसंधान में यह साफ हो गया है कि परीक्षा की स्वच्छता भंग हुई है. नियुक्ति में यह पता लगाना असंभव है कि कौन सफल अभ्यर्थी दोषी है और कौन निर्दोष.
सरकार ने बताया कि CID के दस्तावेजों से साफ है कि नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. परीक्षा में अनियमितता को देखते हुए सरकार को नियुक्ति रद्द करने का अधिकार है. अब मामले की सुनवाई सोमवार दोपहर 2.15 बजे होगी. मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बहस की जाएगी.
याचिकाकर्ताओं ने HC में रखा पक्ष
इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि इन तीनों परीक्षा को TDPL से जोड़ते हुए सरकार ने परीक्षा रद्द की है. जबकि इन परीक्षाओं के लगभग संपन्न होने के बाद जुलाई 2025 में परीक्षा आयोजित करने में TDPL शामिल हुआ था. उस दौरान इन परीक्षा में चयन प्रक्रिया का अंतिम चरण डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन चल रहा था.
JPSC 11वीं-13वीं, सीडीपीओ और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति को लेकर कोई FIR भी नहीं हुआ, कोई समन भी नहीं हुआ. साथ ही किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई. इन परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों के मामले कोई मनी ट्रेल भी सामने नहीं आई है, जिससे पता चले कि परीक्षा में पैसों का कोई लेनदेन हुआ है.
दोनों अधिवक्ताओं ने बताया कि यहां परीक्षा में बड़े पैमाने में गड़बड़ी का भी कोई आरोप नहीं है. CID जांच में भी अबतक उक्त तीनों परीक्षा में गड़बड़ी के कोई साक्ष्य नहीं है. केवल TDPL की संलिप्तता की आशंका का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द की गई. सरकार ने जल्दबाजी और राजनीतिक दबाव में परीक्षा रद्द की है.
अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि सरकार के तरफ से उक्त तीनों परीक्षा में नियुक्ति रद्द करने का वाला नोटिफिकेशन असंवैधानिक है. क्योंकि राज्य सरकार के पास परीक्षा और विज्ञापन रद्द करने का अधिकार नहीं है. यह अधिकार केवल जेएसएससी/ जेपीएससी के पास है.
राज्य सरकार के पास सिर्फ नियुक्ति आदेश रद्द करने का अधिकार है, वह भी संविधान में दी गई प्रक्रिया को अपनाते हुए किया जा सकता है. अब इस मामले में राज्य सरकार अदालत में अपना पक्ष रखेगी.
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि सरकार एक साथ 22 एग्जाम को कैंसिल नहीं कर सकती है, क्योंकि सभी परीक्षाओं के अलग-अलग तथ्य है. सभी परीक्षाओं को एक साथ जोड़कर उसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता बताना गुमराह करने वाला काम है.
11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा मामले में क्वेश्चन पेपर लीक का कोई मामला नहीं सामने आया है. सरकार इस परीक्षा को 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जोड़कर देख रही है और 11वीं से 13वीं जेपीएससी में भी अनियमितता का आरोप लगा रही है.
मामले में याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा-2023 (01/2024), फूड सेफ्टी ऑफिसर (18/2023) और सीडीपीओ (21/2023) नियुक्ति को रद्द करने को चुनौती दी गई है.