5 बिंदुओं में समझिए, ED छवि रंजन को दोबारा रिमांड पर लेकर क्यों कर रही पूछताछ
जानें क्या कहते हैं वकील
alt="" width="600" height="400" /> करीब 30 वर्ष से वकालत कर रहे रांची सिविल कोर्ट के अनुभवी वकील अशोक श्रीवास्तव बताते हैं कि जब से उन्होंने प्रैक्टिस शुरू की, तब से कुर्सियों और टेबल को जंजीरो में ही बंधा देखा. काम खत्म होने के बाद घर लौटते वक्त सभी वकील और उनके मुंशी अपने कार्यालय की कुर्सियों को एक जगह समेट कर उसे टेबल में जंजीर से बांध देते थे. लेकिन अब ये प्रचलन काफी कम हो गया है. अब ज्यादातर वकील अपनी कुर्सियों को बिना जंजीर और ताले के ही छोड़ कर जाते हैं. रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही कहते हैं कि कुछ वर्षों पहले तक वकीलों को खुले आसमान के नीचे कार्य करना पड़ता था. कोर्ट परिसर में बाउंड्री भी नहीं थी और न ही वकीलों के सामान की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी, इसलिए वकील अपनी कुर्सी, टेबल और जरुरी सामानों को जंजीर से बांध कर जाते थे. यह प्रचलन दशकों से चलता आ रहा है. लेकिन अब इसमें कमी आई है. अब जंजीर से बंधी हुई कुर्सियां एकदम कम दिखाई देती हैं. इसे भी पढ़ें - अमित">https://lagatar.in/remarks-on-amit-shah-case-rahul-gandhi-gets-relief-from-hc-final-debate-on-tuesday/">अमित
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