आरक्षण के मौलिक अधिकारों की अवहेलना
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में यह भी कहा गया है कि बिहार राज्य से विभाजन के बाद झारखंड में सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज में नियुक्ति के लिए आरक्षण के अधिनियमों का पालन कभी नहीं किया गया. ऐसा कर के झारखंड राज्य ने संविधान द्वारा अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों को दिए गए आरक्षण के मौलिक अधिकारों की अवहेलना की है. अब तक झारखंड राज्य में सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज की नियुक्ति ‘सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विसेज (रेक्रूट्मेंट, अपॉइंटमेंट एंड कंडिशंस ऑफ सर्विस) रूल 2001’ के अनुरूप की जा रही है, जो उस वक़्त के तत्कालीन राज्यपाल की देखरेख में तैयार की गयी थी. इसे भी पढ़ें – पूजा">https://lagatar.in/nishikants-tweet-war-in-the-worship-episode-will-reveal-the-secret-of-chaudharyjis-mobile-details-in-installments/">पूजाप्रकरण में निशिकांत का ट्विट ‘वार’, चौधरीजी के मोबाइल डिटेल का राज किश्तों में खोलेंगे [wpse_comments_template]

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