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पीरटांड़ : पालगंज में धूमधाम के साथ मनाया गया भोक्ता पर्व

Pirtand (Giridih) : पीरटांड़ थाना क्षेत्र के पालगंज पंचायत स्थित महादेव मंडा में बुधवार 13 अप्रैल को धूमधाम से भोक्ता पर्व मनाया गया. लगभग 50 श्रद्धालुओं ने 5 दिनों तक उपवास रखकर यह व्रत किया. अंतिम दिन सभी 50 श्रद्धालुओं ने अपनी पीठ, बांह व शरीर के अन्य हिस्सों में लोहे का किल चुभा कर ऊंचे बने विशाल झूले में रस्सी के सहारे झूलने की परंपरा निभाई. इस नज़ारे को देखने के ले भारी संख्या में लोग पालगंज पहुंचे थे. पांच दिवसीय मेला में गिरिडीह, देवघर, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जामताड़ा, दुमका सहित कई जिलों से आये हजारों लोगों ने इस मेले में पहुंचकर पूजा अर्चना की. [caption id="attachment_606189" align="alignnone" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/BHOKTA-2-300x225.jpg"

alt="" width="300" height="225" /> ऊंची मचान पर अपनी बारी की प्रतीक्षा में खड़े श्रद्धालु[/caption] लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा है भोक्ता पर्व भोक्ता पर्व बड़ी आबादी के गहरी आस्था से जुड़ा अनुष्ठान है. पालगंज की अपनी एक अलग ही मान्यता है. राजा के जमाने से लेकर अब तक यह पर्व यहां बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. मान्यता है कि अपने शरीर में लोहे का किल चुभा कर भगवान शंकर को प्रसन्न किया जाता है. [caption id="attachment_606190" align="alignnone" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/BHOKTA-MANDAR-300x225.jpg"

alt="" width="300" height="225" /> ढ़ोल नगाड़े के साथ मैदान में महादेव मंडा पहुंचते श्रद्धालु[/caption] किंवदंती हैं कि भगवान शंकर को खुश करने के लिए सबसे पहले बाणासुर ने यह पर्व किया था. इसलिए इसे राक्षसी पूजा भी कहते हैं. भगवान शंकर को पाने के लिए बाणासुर ने अपने शरीर में लोहे का किल ठुकवा लिया था जो परंपरा आजतक चलती आ रही है. यह">https://lagatar.in/giridih-when-the-wife-refused-to-come-from-her-maternal-home-the-young-man-hanged-himself/">यह

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