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GLA कॉलेज की जमीन पर 200 से ज्यादा पेड़ काटकर गर्ल्स हॉस्टल बनाने की तैयारी

Ranchi News: नई शिक्षा नीति 200 के आलोक में उच्च शिक्षण संस्थानों को शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना चलायी जाती है. इसे प्रधानमंत्री उच्च शिक्षा अभियान (PM-USHA) के नाम से जाना जाता है. शिक्षा मंत्रालय ने इस योजना के तहत पलामू जिले में Gender Inclusion  & Equality Initiatives के उद्देश्य से 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है.
 

Ranchi News: GLA कॉलेज, पलामू की जमीन पर 200 से अधिक पेड़ काटकर गर्ल्स हॉल्टल बनाने की तैयारी चल रही है. PM-USHA के 10 करोड़ रुपये फंड से हॉस्टल बनाया जाना है. फिलहाल पेड़ों की गिनती पर विवाद कायम है. वन विभाग की रिपोर्ट में सिर्फ 118 पेड़ों का उल्लेख किया गया है. जबकि वहां 200 से ज्यादा पेड़ हैं. नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) के अधिकार विहीन कुलपति इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं.


नई शिक्षा नीति 200 के आलोक में उच्च शिक्षण संस्थानों को शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजना चलायी जाती है. इसे प्रधानमंत्री उच्च शिक्षा अभियान (PM-USHA) के नाम से जाना जाता है. शिक्षा मंत्रालय ने इस योजना के तहत पलामू जिले में Gender Inclusion  & Equality Initiatives के उद्देश्य से 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. कैबिनेट से इस योजना की प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी है.

 

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जमीन पर लगे पेड़


इस राशि से झारखंड भवन निर्माण निगम के माध्यम से गर्ल्स हॉस्टल बनाने का फैसला किया गया. निगम ने हॉस्टल के लिए 9.96 करोड़ रुपये का DPR तैयार किया है. DPR को तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है. गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण GLA कॉलेज (गणेश लाल अग्रवाल कॉलेज) की जमीन पर किया जाना है. कॉलेज के लिए गणेश लाल अग्रवाल ने जमीन दान में दी थी. नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) का भवन भी इसी कॉलेज की जमीन पर बना है.

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गर्ल्स हॉस्टल निर्माण की जमीन


PM-USHA के पैसों से GLA कॉलेज की जमीन के जिस हिस्से पर गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण की योजना है, उस जमीन पर पेड़ लगे हुए हैं. इसे काटे बिना हॉस्टल का निर्माण संभव नहीं है. इस बात के मद्देजर कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने वन विभाग को पत्र लिखकर पेड़ काटने की अनुमति मांगी. कॉलेज के अनुरोध पर रेंजर ने स्थल का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट वन प्रमंडल पदाधिकारी को सौंपी. इसमें कुल 118 पेड़ों के होने का उल्लेख किया गया. रेंजर द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट में पेड़ों की मोटाई 60- 260 सेंटीमीटर तक की बतायी गयी है.


रेंजर की रिपोर्ट में पेड़ों की संख्या का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रस्तावित निर्माण स्थल पर यूकलिप्टस के 117 और सागवान के एक पेड़ हैं. रेंजर की इसी रिपोर्ट के आधार पर पेड़ों को काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि अब तक पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिली है. कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने 25 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी कर वन विभाग के मदद करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है. इसमें डॉक्टर नीतू कमारी, एन नवाज और सुखदेव का नाम शामिल है.

 

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पेड़ के सिलसिले में रेंजर की रिपोर्ट


इस बीच स्थानीय स्तर पर वन विभाग द्वारा रेंजर की रिपोर्ट पर सवाल उठाया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि रिपोर्ट में पेड़ों की संख्या का गलत उल्लेख किया गया है. प्रस्तावित निर्माण स्थल पर 200 से अधिक पेड़ हैं. इसमें यूकलिप्टस, शीशम, सागवान आदि के पेड़ हैं. इसके अलावा वन विभाग द्वारा लगाये गये पेड़ भी हैं. वन विभाग ने पेड़ लगाने के बाद उसकी सुरक्षा के लिए घेरा बना रखा है. इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर हॉस्टल निर्माण का विरोध किया जा रहा है.  लेकिन अधिकार विहीन कुलपति हॉस्टल बनाने के मामले में काफी दिलचस्ली ले रहे हैं.

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