सरकारी शिक्षकों को जनगणना आदि कार्यों में लगाने पर कांग्रेस नेता डॉ. आरसी मेहता ने दी कड़ी प्रतिक्रिया सरकार से जनोपयोगी विधेयक पास करने का आग्रह Hazaribagh: झारखंड के सरकारी स्कूलों में उच्चतम शिक्षा प्राप्त शिक्षक कार्यरत हैं, जिनका वेतन 60 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह है. वहीं, प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की औसतन सैलरी 3000 से लेकर 15000 रुपये प्रति माह है. लेकिन, सरकारी विद्यालय के शिक्षक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं. क्योंकि, सरकार की गलत नीतियों के कारण सरकारी शिक्षकों को खिचड़ी से लेकर पशु और मानव जनगणना इत्यादि कार्यों में लगाया जाता है. इसके कारण सरकारी स्कूलों में बच्चों का पठन-पाठन 10 से 20% भी नहीं हो पाता है. दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल के शिक्षक मन लगाकर के पढ़ते हैं और रिजल्ट भी अच्छा देते हैं. यही वजह है कि गरीब अभिभावक अभाव में भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ना पसंद करते हैं. वही सरकारी स्कूल में नि:शुल्क शिक्षा के बावजूद बच्चों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है. उक्त बातें कांग्रेस पार्टी के प्रमंडलीय नेता डॉ. आरसी मेहता ने इचाक के एसएन पब्लिक स्कूल के वार्षिक उत्सव समारोह के दौरान कही. इसे भी पढ़ें-हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-anil-ram-becomes-central-member-of-ajsu-party/">हजारीबाग
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सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी जताया क्षोभ
डॉ. मेहता ने सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर भी क्षोभ जताया. उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार स्वास्थ्य के मंदिर (हॉस्पिटल) और शिक्षा के मंदिर (स्कूल) को जनकल्याण हेतु जन उपयोगी विधेयक पास करे. स्कूल के वार्षिक महोत्सव में स्कूल के संस्थापक नागेश्वर महतो, समाजसेवी अभिषेक कपरदार, राजकुमार मेहता, संजय यादव, वीरेंद्र सिंह, गिरधारी महतो, चंद्रदेव महतो, ब्रजकिशोर मेहता, अविनाश कुमार, मुकेश कुमार, सुदीप धवन, कुलदीप राम, प्रकाश राम, समेत सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे."पढ़-लिख कर जॉब सीकर नहीं जॉब क्रिएटर बनें"
मुख्य अतिथि डॉ. मेहता ने कहा कि बच्चे पढ़-लिख कर नौकरी देने वाले बनें, ना कि नौकरी खोजने वाले बने. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की तरह ही देश के तमाम सरकारी अस्पतालों की स्थिति है. सरकार को चाहिए कि सरकारी स्कूल के डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगा दे, तभी सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधर लाया जा सकता है. कानून ने 8 घंटा सरकारी ड्यूटी करने के बाद सरकारी डॉक्टरों को प्राइवेट प्रेक्टिस करने की छूट दी है. सरकारी अस्पतालों में लोग लाचारी में इलाज कराते हैं. वहीं, थोड़ भी क्षमतावान लोग प्राइवेट स्कूल और प्राइवेट अस्पताल को प्राथमिकता देते हैं. इसे भी पढ़ें-सीएम">https://lagatar.in/cm-hemant-soren-inaugurated-the-national-khadi-and-saras-mahotsav/">सीएमहेमंत सोरेन ने किया राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव का उद्घाटन [wpse_comments_template]
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