NewDelhi : बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य मनन मिश्रा द्वारा दिये गये वकीलों की फर्जी डिग्री वाले बयान पर बवाल मचा हुआ है.
मनन मिश्रा के बयान का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गयी है. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिकामें श्री मिश्रा के बयान का विरोध किया गया है.
साथ ही फर्जीवाड़े को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गयी है. रिट याचिका में भारत सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी राज्यों की बार काउंसिल सहित यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) से वकीलों की योग्यताओं के लिए पारदर्शी और यूनिफाइड वेरिफिकेशन सिस्टम बनाने की मांग की गयी है.
दरअसल मामला यह है कि मनन मिश्रा ने शनिवार को दावा किया था कि 35-40 फीसदी वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां है. वे फर्जी सर्टिफिकेट के माध्यम से अदालतों में वकालत कर रहे हैं.
मनन मिश्रा ने कहा था बीसीआई को यह जानकारी है कि कोर्ट परिसरों में काले कोट और बैंड पहने देखे जाने वाले लगभग 35- 40 प्रतिशत वकील फर्जी हैं. उनकी डिग्रियां नकली हैं.
उन्होंने कहा कि जब बार काउंसिल ने वकीलों की डिग्रियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की, तब 40 प्रतिशत वकीलों ने सत्यापन फॉर्म जमा ही नहीं किये. इन वकीलों की डिग्रियों पर संदेह पैदा होता है.
मनन मिश्रा के अनुसार इस मुद्दे से CJI जस्टिस सूर्यकांत को अवगत कराया गया है. न्यायपालिका और बार काउंसिल मिलकर इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रहे हैं
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