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प्रधानमंत्री मोदी ने अरुणाचल में सेला सुरंग का उद्घाटन किया, कहा, कांग्रेस ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया

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  Itanagar/Guwahati : पीएम मोदी ने आज शनिवार को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सेला सुरंग का उद्घाटन किया. यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग तक हर मौसम में संपर्क सुविधा उपलब्ध करायेगी. पीएम ने कहा कि कांग्रेस सरकार पहले ही इसका निर्माण करा सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अरुणाचल प्रदेश में केवल दो लोकसभा सीट होने के कारण इसके सीमावर्ती गांवों की उपेक्षा की. कहा कि कांग्रेस ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया. नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">नेशनल

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सशस्त्र बलों को कमजोर रखने की कांग्रेस की नीति रही है

प्रधानमंत्री ने ईटानगर में आयोजित कार्यक्रम में कहा, मोदी संसदीय सीटों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि राज्य की आवश्यकताओं के आधार पर काम करता है ताकि देश को मजबूत बनाया जा सके. पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि सीमावर्ती क्षेत्रों को विकसित नहीं करने और सशस्त्र बलों को कमजोर रखने की कांग्रेस की नीति रही है, लेकिन हम एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में विश्वास करते हैं. उन्होंने सेला और तवांग के लोगों को आश्वासन दिया कि लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वह उनसे मिलने आयेंगे. लगभग 825 करोड़ रुपये की लागत से बनी सेला सुरंग इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है.

सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन  ने 13,000 फुट की ऊंचाई पर किया है

इस सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 13,000 फुट की ऊंचाई पर किया है. यह अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चारीद्वार-तवांग रोड पर सेला दर्रे से गुजरते हुए तवांग तक हर मौसम में संपर्क उपलब्ध करायेगी. इससे पहले, सेला दर्रे तक के मार्ग में केवल एकल-लेन संपर्क सुविधा थी जिसमें मोड़ जोखिम भरे थे, जिसके कारण भारी वाहन और कंटेनर ट्रक तवांग नहीं जा पाते थे. कहा गया है कि सुरंग का निर्माण कार्य कठिन इलाके और प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों को पार करते हुए केवल पांच साल में पूरा किया गया. इसमें 1,003 मीटर और 1,595 मीटर लंबी दो सुरंगें हैं. दूसरी सुरंग में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार मुख्य सुरंग की बगल में एक एस्केप ट्यूब (आपात स्थिति में बचकर निकलने का मार्ग) है. इस सुरंग से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के साथ प्रतिदिन 3,000 कार और 2,000 ट्रक निकल सकते हैं. इसका निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का उपयोग कर किया गया है.

 कांग्रेस सरकार की गलत नीतियों  से विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पशुओं का शिकार हुआ

प्रधानमंत्री मोदी ने असम में 17,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन करने के बाद यहां मेलेंग मेतेली पोथार में एक जनसभा को संबोधित किया. कहा कि विरासत और विकास डबल इंजन सरकार का मंत्र है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की असंवेदनशील और अनियोजित संरक्षण रणनीति के कारण यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पशुओं का शिकार हुआ. उन्होंने कहा कि 2013 में लगभग 27 गैंडे मारे गये थे लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की नीतियों के कारण 2022 में अवैध शिकार की ऐसी घटनाओं की संख्या शून्य हो गयी.

अहोम सेनापति लचित बोड़फूकन की कांसे की प्रतिमा का अनावरण  

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी असम के जोरहाट में अहोम सेनापति लचित बोड़फूकन के समाधि स्थल पर उनकी 125 फुट ऊंची कांसे की प्रतिमा का शनिवार को अनावरण किया. इस स्टैच्यू ऑफ वेलर (वीरता की प्रतिमा) की ऊंचाई 84 फुट है और इसे 41 फुट की चौकी पर स्थापित किया गया है. इससे यह संरचना 125 फुट ऊंची हो गयी है. प्रधानमंत्री ने टोक के समीप होलोंगापार में लचित बोड़फूकन मैदाम डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट में इस प्रतिमा का अनावरण किया. 16.5 एकड़ से अधिक के इस क्षेत्र का विकास एक पर्यटक स्थल के रूप में किया जा रहा है जो क्षेत्र के इतिहास को दर्शाता है.

लचित बोड़फूकन अहोम साम्राज्य (1228-1826) के एक महान सेनापति थे

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फरवरी 2022 में इस प्रतिमा की नींव रखी थी.  लचित बोड़फूकन अहोम साम्राज्य (1228-1826) के एक महान सेनापति थे. उन्हें 1671 की सरायघाट की लड़ाई में उनके नेतृत्व के लिए जाना जाता है, जिसमें राजा रामसिंह प्रथम के नेतृत्व में असम को वापस हासिल करने के लिए शक्तिशाली मुगल सेना के प्रयास को विफल कर दिया गया था.  उनका बीमारी के कारण 49 वर्ष की आयु में एक साल बाद निधन हो गया था और उन्हें अहोम के शाही परिवार के लिए बने होलोंगापार के इस मैदान में दफनाया गया था,   [wpse_comments_template]

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