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लाल किले से पीएम मोदी का संदेश: 2047 तक विकसित भारत का संकल्प, ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया. अपने लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा कि देश को अब बड़े लक्ष्य तय कर तेज गति से आगे बढ़ना होगा.
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Lagatar Desk

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया. अपने लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा कि देश को अब बड़े लक्ष्य तय कर तेज गति से आगे बढ़ना होगा.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ को केंद्र में रखा. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई लड़ने वाले वीरों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है. उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और नए लक्ष्य तय करने का आह्वान किया.

 

‘वंदे मातरम्’ का विशेष उल्लेख

पीएम मोदी ने इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने को ऐतिहासिक अवसर बताया. उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक के दिल में ‘वंदे मातरम्’ की भावना होनी चाहिए. लाल किले से उन्होंने देश की एकता, राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन के बलिदानों को याद किया.

 

ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होगी. उन्होंने बताया कि देश गैस, ईंधन और उर्वरक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. किसानों को लेकर उन्होंने कहा कि जिस यूरिया की कीमत विदेशों में करीब 3,000 रुपये है, वह भारतीय किसानों को करीब 300 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क के विस्तार का भी उल्लेख किया.

 

मोदी ने समुद्री क्षेत्र में ऊर्जा और खनिज संसाधनों की खोज का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पहले जिन तटीय क्षेत्रों को ‘नो-गो’ माना जाता था, उनमें से बड़े हिस्से को अब खोज और अन्वेषण के लिए खोला गया है. इसका उद्देश्य देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाना है.

 

‘शक्ति की सप्त धारा’ का विजन

प्रधानमंत्री ने भारत के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’ की अवधारणा पर जोर दिया. इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को अहम बताया गया. उनका कहना था कि भारत को वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमता और संसाधनों के दम पर आगे बढ़ना होगा.

 

गरीबी से बाहर आए 25 करोड़ लोग

प्रधानमंत्री ने सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं. उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताते हुए कहा कि देश अब बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की स्थिति में है.

 

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने हाल की प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि संकट के समय पूरा देश एकजुट होकर प्रभावित लोगों के साथ खड़ा होता है.

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