NewDelhi : आम आदमी पार्टी के संयोजक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह को अहमदाबाद की एक अदालत ने मानहानि केस में तलब किया है. शराब घोटाले में घिरने के बाद केजरीवाल अब एक नये मामले में फंसते दिख रहे हैं. जान लें कि अदालत ने प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर गुजरात विश्वविद्यालय के खिलाफ केजरीवाल और संजय सिंह द्वारा दिये गये व्यंग्यात्मक, अपमानजनक बयानों के लिए आपराधिक मानहानि शिकायत पर समन जारी किया है.
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की न्यूज डायरी।।16 APR।।झारखंड को बर्बाद कर रही राज्य सरकार-सुदेश।।कोल कारोबारी अभय सिंह गए जेल।।बिहारःजहरीली शराब से अबतक 26 की मौत।।अडानी भ्रष्टाचार के प्रतीक- राहुल।।प्रयागराज एनकाउंटरःविपक्ष आगबबूला।।समेत कई खबरें और वीडियो।। दोनों नेताओं को 23 मई को पेशी को लिए बुलाया गया
खबरों के अनुसार अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जयेशभाई चोवाटिया की अदालत ने शनिवार को आप के इन दोनों नेताओं को 23 मई को पेशी को लिए बुलाया है. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया गुजरात विश्वविद्यालय के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) के तहत मामला मानते हुए गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल की एक शिकायत पर समन भेजा है. अदालत ने मामले के वाद शीर्षक में केजरीवाल के नाम से मुख्यमंत्री शब्द हटाने का भी आदेश दिया, यह कहते हुए कि बयान उन्होंने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में दिये थे.
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अहमद और अशरफ के शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद आज ही दफनाया जायेगा, राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठाया गुजरात विवि को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां मानहानि की श्रेणी में आती हैं
याद करें कि केजरीवाल और संजय सिंह ने अपमानजनक बयान गुजरात हाईकोर्ट द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त के उस आदेश को रद्द करने के आदेश के बाद दिया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) को पीएम मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी मांगी गयी थी. शिकायतकर्ता रजिस्ट्रार पीयूष पटेल के अनुसार, उन्होंने मोदी की डिग्री को लेकर विश्वविद्यालय को निशाना बनाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस और ट्विटर हैंडल पर अपमानजनक बयान दिये. कहा कि गुजरात विवि को निशाना बनाने वाली उनकी टिप्पणियां मानहानि की श्रेणी में आती हैं. इससे संस्थान की प्रतिष्ठा को चोट पहुंची, जिसने जनता के बीच अपना नाम स्थापित किया है.
आरोपियों के बयान से विश्वविद्यालय के बारे में अविश्वास पैदा होगा
बता दें कि गुजरात विश्वविद्यालय की स्थापना 70 साल सेपहले हुई थी. शिकायतकर्ता के वकील अमित नायर का तर्क था कि यह लोगों के बीच प्रतिष्ठित है और आरोपी के बयान से विश्वविद्यालय के बारे में अविश्वास पैदा होगा. शिकायकर्ता ने केजरीवाल के हवाले से टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए कहा, अगर कोई डिग्री है और वह असली है तो इसे दिखाया क्यों नहीं जा रहा? वे डिग्री नहीं दे रहे हैं क्योंकि यह फर्जी हो सकती है और अगर प्रधानमंत्री दिल्ली विश्वविद्यालय तथा गुजरात विश्वविद्यालय में पढ़े तो गुजरात विश्वविद्यालय को जश्न मनाना चाहिए कि हमारा छात्र देश का प्रधानमंत्री बन गया. शिकायतकर्ता के अनुसार, संजय सिंह ने कहा था, वे प्रधानमंत्री की फर्जी डिग्री को असली साबित करने की कोशिश कर रहे हैं. [wpse_comments_template]
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