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पीएम मोदी का पहला पॉडकास्ट : राजनीति में सफलता का सीक्रेट, डेडिकेशन, टैलेंट, जनता, बचपन, सब पर कुछ न कुछ कहा...

NewDelhi : पीएम नरेंद्र मोदी का पहला रिकॉर्ड किया हुआ पॉडकास्ट आज शुक्रवार को जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया. बातचीत के क्रम में पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किये हैं. उन्होंने पॉडकास्ट में किसी राजनेता के सफल होने का सीक्रेट बताया है. कहा कि एक अच्छा टीम प्लेयर ही अच्छा राजनेता बन सकता है. राजनेताओं के टैलेंट के संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा, मैं मानता हूं कि उसके लिए आपका एक डेडिकेशन चाहिए, कमिटमेंट चाहिए, जनता के सुख-दुख के आप साथी होने चाहिए. आप अच्छे टीम प्लेयर होने चाहिए. आप कहें कि मैं तो तीसमार खां हूं, सबको चलाऊंगा, दौड़ाऊंगा, सब मेरा हुक्म मानेंगे तो हो सकता है कि उसकी राजनीति चल जाये या चुनाव जीत जाये, लेकिन वो सफल राजनेता बनेगा यह गारंटी नहीं है.

इच्छा हुई कि बचपन के दोस्तों को मुख्यमंत्री आवास बुलायें

अपने पुराने दिनों की याद करते हुए बताया कि जब वह अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो उन्हें इच्छा हुई कि वह अपने बचपन के दोस्तों को मुख्यमंत्री आवास बुलाएं.उन्होंने बताया कि उनके निमंत्रण पर उनके 35 दोस्त अपने परिजनों के साथ आये लेकिन उन्हें वह नहीं मिला, जो वह ढूंढ़ रहे थे. पीएमने बताया कि वह उन लोगों में दोस्त खोज रहे थे लेकिन वे सभी मुझमें मुख्यमंत्री देख रहे थे. आजादी के बाद देश में जितने भी बड़े नेता थे, सभी आजादी के आंदोलन से निकले थे : उन्होंने कहा, जब आजादी का आंदोलन चला, उसमें समाज के सभी वर्ग के लोग जुड़े. सभी राजनीति में नहीं आये. लेकिन देशभक्ति से प्रेरित आंदोलन था, हर एक के मन में एक जज्बा था कि भारत को आजाद कराने के लिए मुझसे जो होगा मैं करूंगा. तब एक लॉट राजनीति में आये. आजादी के बाद देश में जितने भी बड़े नेता थे, सभी आजादी के आंदोलन से निकले थे, तो उनकी सोच, मेच्योरिटी एकदम अलग है. समाज के प्रति समर्पण भाव. पीएम ने कहा, इसलिए मेरा मत है कि राजनीति में निरंतर अच्छे लोग आते रहने चाहिए. लोग मिशन लेकर आए एम्बिशन लेकर नहीं. मिशन लेकर निकले हो तो कहीं न कहीं स्थान मिल जाएगा. पर्सनालिटी में दुबले पतले, भाषण देने की कला न के बराबर थी : उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण दिया, पीएम ने कहा, आज के युग की नेता की परिभाषा जो आप देखते हैं, तो उसमें महात्मा गांधी कहां फिट होते हैं. पर्सनालिटी में दुबले पतले, भाषण देने की कला न के बराबर थी. तो जीवन बोलता था. ये जो ताकत थी, उसने उनके पीछे पूरे देश को खड़ा कर दिया था. आजकल ये जो प्रोफेशल कैटेगरी में राजनेता का जो रूप देखा जा रहा है कि लच्छादार भाषण होना चाहिए, यह कुछ दिन चल जाता है. आखिर में जीवन ही काम करता है. भाषण कला, उससे भी ज्यादा जरूरी है बातचीत करना   :  पीएम मोदी ने कहा, दूसरा मेरा मत है कि भाषण कला, उससे भी ज्यादा जरूरी है बातचीत करना. महात्मा गांधी हाथ में अपने से भी ऊंचा डंडा करते, लेकिन अहिंसा की वकालत करते थे. महात्मा जी ने कभी टोपी नहीं पहनी, लेकिन दुनिया गांधी टोपी पहनती थी. महात्मा गांधी चुनाव नहीं लड़े, सत्ता पर नहीं बैठे, लेकिन मृत्यु के बाद जगह बनी, उसका नाम राजघाट रखा. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वह बचपन में एक सामान्य छात्र थे : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, वह बचपन में एक सामान्य छात्र थे. किसी भी तरह से कोई उन्हें नोटिस करे, ऐसा नहीं था. लेकिन टीचर उनसे बहुत प्यार करते थे. निखिल कामत को दिये इंटरव्यू में पीएम मोदी ने वह बात भी बताई, जिससे वह दूर भागते थे. उन्होंने कहा कि अगर ज्यादा पढ़ना है और उसमें कॉप्टिशन ऐलिमेंट है तो मैं उससे दूर भागता था. पीएम मोदी ने यह सब उस सवाल के जवाब में कहा, जिसमें पूछा गया था कि क्या वे बचपन में अच्छे स्टूडेंट थे? उन्होंने खुद को सामान्य स्टूडेंट ही बताया. एक टीचर थे वे एक दिन पिता जी से मिलने गये  : पीएम मोदी ने कहा, `एक टीचर थे वे एक दिन पिता जी से मिलने गये. उन्होंने पिता जी से कहा कि इसके अंदर एक टैलेंट है, लेकिन यह कोई ध्यान केंद्रित नहीं करता है. हर चीज बहुत जल्दी ग्रैस्प करता है, लेकिन फिर अपनी दुनिया में खो जाता है. टीचर की बहुत अपेक्षा भी थी. कहा, मेरे टीचरों का मुझपर बहुत प्यार रहता था. लेकिन ज्यादा पढ़ना है और उसमें कॉम्प्टिशन का ऐलिमेंट है तो उससे मैं दूर भागता था. मेरा ऐसा रहता था कि परीक्षा पास कर लो, निकाल लो, बस ऐसा ही रहता था. लेकिन और एक्टिविटी मैं बहुत करता था. कुछ भी नई एक्टिविटी है, उसे पकड़ लेना, ऐसा मेरा नेचर था. मैंने बचपन में बहुत कम उम्र में घर छोड़ दिया  :  बचपन के दोस्तों के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, मैंने बचपन में बहुत कम उम्र में घर छोड़ दिया और सबकुछ छोड़ दिया. किसी से कोई संपर्क नहीं था न कोई लेना-देना था. लेकिन जब मैं सीएम बना तो मेरे मन में कुछ इच्छाएं जगीं कि क्लास के जितने भी दोस्त हैं, सबको मैं सीएम हाउस में बुलाऊंगा. इसके पीछे मैं सोचता था कि मैं नहीं चाहता था कि किसी को ऐसे लगे कि सीएम बनने पर बहुत तीस मारखां बन गया. मैं वो ही हूं जो सालों पहले गांव छोड़कर गया था. पीएम मोदी ने कहा, मैंने सबको बुलाया और रात में खाना वगैरह खाया और गपशप की. पुरानी बातें याद कीं, लेकिन मुझे बहुत आनंद नहीं आया, क्योंकि मैं दोस्त खोज रहा था, लेकिन उनको मुख्यमंत्री नजर आता था. खाई मिटी नहीं और मेरे जीवन में तू कहने वाला कोई बचा ही नहीं. अभी भी सबसे संपर्क है, लेकिन वे बहुत सम्मान से मुझे देखते हैं. एक टीचर थे रासबिहारी मणियाल, वे मुझे चिट्ठी लिखते थे, जिसमें मुझे तू कहते थे. सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता बेहद जरूरी  : सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों पर पीएम मोदी ने कहा, चाहे परिवार हो, दफ्तर हो या राजनीति, आपसी अनबन हर जगह होती है.  लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंसान को मोटी चमड़ी का होना चाहिए. उन्होंने कहा, सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। बिना संवेदनशीलता के आप दूसरों का भला नहीं कर सकते. मैंने कहीं पढ़ा था कि एक चायनीज फिलॉस्फर ह्वेनत्सांग मेरे गाव में रहे थे :  प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उनका जन्म गुजरात राज्य के महेसाणा जिले में स्थित वडनगर ग्राम में हुआ था. उन्होंने कहा, मैंने कहीं पढ़ा था कि एक चायनीज फिलॉस्फर ह्वेनत्सांग मेरे गाव में रहे थे. उस समय उन पर एक फिल्म बनाई जा रही थी. तो मैंने एंबेसी या किसी को  पत्र  लिखा था कि ह्वेनत्सांग मेरे गांव में रहे थे. अगर फिल्म बना रहे हैं तो इसका भी कहीं जिक्र करना. वो बहुत साल पहले की बात है, 2014 में जब मैं प्रधानमंत्री बना, तो दुनियाभर के नेताओं ने शिष्टाचार के तौर पर कॉल करके मुझे बधाई दी.  

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