Ramgarh : डीएवी बरकाकाना में नोबेल के साहित्य पुरस्कार से सम्मानित कवि गुरु रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती मनाई गई. इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्य सह क्षेत्रीय अधिकारी ने विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. रवींद्र नाथ टैगोर एक साथ साहित्यकार, संगीतज्ञ, शिक्षाविद और विचारक के रूप में जाने जाते हैं. उनके द्वारा विरचित गीत नृत्य एवं हास्य नाटक की प्रस्तुति कक्षा प्रथम से वर्ग नवम तक के छात्र- छात्राओं के द्वारा किया गया. एलकेजी एवं यूकेजी के नन्हे- मुन्ने बच्चे गुरुदेव द्वारा विरचित नृत्य नाटिका "काल मृगया" से उद्धृत एक मनमोहक अंश को नृत्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बोल हैं झूम-झूम फूल- फूल. कक्षा प्रथम के बच्चों ने एक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसका भाव सुख-दुख को कैसे आपस में बांटा जाए से संबंधित है. वर्ग तृतीय के बच्चे गीत अमरा सोबाई राजा पर नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें यह दिखलाने की कोशिश की गई कि कैसे राजा धीरे-धीरे प्रजा के समकक्ष आते चले गए. इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्य सह क्षेत्रीय अधिकारी उर्मिला सिंह ने रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा विरचित अंग्रेजी कविता "वेयर द माइंड इज विदाउट फीयर" का जिक्र करते हुए कहा कि यह कविता आजादी के बाद उस परिपेक्ष्य में लिखा गया है कि जब हम भारतीय अपना सर्वांगीण विकास करके देंगे तो हम कैसे होंगे. प्राचार्या ने कहा कि वह व्यक्ति महानता को प्राप्त करता है, जो प्रकृति में होने वाले क्षणिक परिवर्तन को समझ जाता है. ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे, तभी तो वह एक साथ शिक्षाविद, साहित्यकार, कला मर्मज्ञ, संगीतज्ञ के रूप में अपने को स्थापित कर पाए.

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