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झारखंड साहित्य पुरस्कार से सम्मानित हुए नौ भाषाओं के कवि और लेखक

Ranchi: अखिल झारखंड साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित झारखंड साहित्य पुरस्कार समारोह में नौ भाषाओं के लेखकों और कवियों को झारखंड साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इनमें जनजातीय भाषाएं मुंडारी, कुड़ुख, संथाली, हो, खड़िया और क्षेत्रीय भाषाएं पंचपरगणिया, कुरमाली, खोरठा और नागपुरी शामिल थीं. यह कार्यक्रम रांची प्रेस क्लब में आयोजित हुआ. इस दौरान लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान शिव शंकर महली को डॉ. रामदयाल मुंडा स्मृति सम्मान से नवाजा गया. रोज केरकेट्टा को डॉ. बीबी केसरी स्मृति सम्मान दिया गया. वहीं, नागपुरी भाषा से डॉ. सविता केसरी को पुस्तक "नागपुरी कवि कंचन जीवन और साहित्य समाज" पर साहित्य शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया.कुड़ुख भाषा से डॉ. हरि उरांव को पुस्तक "कुड़ुख भाषा क्रियाओं का अध्याय" पर सम्मानित किया गया. खोरठा भाषा से डॉ. गजाघर महतो प्रभाकर को पुस्तक "आब ना रहा पटाईल" के लिए सम्मानित किया गया. मुंडारी भाषा से श्री मंगल सिंह मुंडा की पुस्तक "छैला संदु" के लिए सम्मानित किया गया.कुड़माली से रतन कुमार महतो सत्यार्थी की पुस्तक "झलज मलआलअ" के लिए सम्मान मिला. हो भाषा से हयम सिविल दुरं को पुस्तक "कोबरो बुड़ीउली" के लिए पुरस्कार मिला. संथाली से चुंडा सोरेन सिपाही की पुस्तक "हाप डाम खेवाक सावता जिमोन" के लिए पुरस्कार मिला. पंचपरगणिया से प्रोफेसर परमानंद महतो को पुस्तक "पुस पीठा कहानी संग्रह" के लिए सम्मानित किया गया. खड़िया भाषा से डॉ. अनिल बिरेद्र कुल्लु की पुस्तक "सोरेड खोड़ी (चट्टानी)" के लिए पुरस्कार मिला.

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