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सात साल से कम सजा वाले अपराधों में बिना नोटिस पुलिस नहीं कर सकती आरोपी को गिरफ्तार

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alt="" width="300" height="200" /> कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारी[/caption] Jamshedpur :  सीआरपीसी 41ए एवं जुबेनाइल जस्टिस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने को सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से जमशेदपुर के पुलिसकर्मियों को अवगत कराने के लिए बिष्टुपुर थाना परिसर स्थित कांफ्रेंस हॉल में मंगलवार को कार्यशाला आयोजित की गई. जमशेदपुर पुलिस के लीगल एडवाइजर राजीव रंजन, डीएसपी हेडक्वार्टर-2 कमल किशोर सहित अन्य पुलिस पदाधिकारियों ने कार्यशाला को संबोधित किया. इस दौरान सभी थाना प्रभारी एवं अनुसंधान पदाधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश से अवगत कराया गया, जिसमें सात साल से कम सजा वाले अपराधों में प्रतिवादी की गिरफ्तारी से पहले उसे नोटिस निर्गत करना है. इसका जिक्र सीआरपीसी की धारा 41ए में किया गया है.

बाल अपराध से जुड़े मामलों से निपटने के लिए जेजे एक्ट के बारे में बताया गया

बाल अपराध से जुड़े मामलों में प्रभावी तरीके से काम करने के लिए जेजे एक्ट के बारे में बताया गया. बाल मित्र थानों में प्रतिनियुक्त बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को इस पर ध्यान देने के लिए कहा गया. डीएसपी हेड क्वार्टर-2 कमल किशोर ने बताया कि आजकल अपराध के नए-नए तरीके अपनाए जाते हैं. इसलिए पुलिस को अपने अनुसंधान को सूक्ष्मता से पूरा करना होगा, जिससे अपराधियों को सजा दिलाई जा सके. कार्यशाला में साइबर ठगी एवं आइटी एक्ट से जुड़े मामले भी बताए गए. कार्यशाला में जमशेदपुर के अधिकांश थानों के थाना प्रभारी, एसआई, एएसआई आदि मौजूद थे.

जेजे बोर्ड में स्थायी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की मांग

इस बीच, जमशेदपुर बार एसोसिएशन के सीनियर एडवोकेट सुधीर कुमार पप्पू ने जमशेदपुर जुबेनाइल जस्टिस बोर्ड में स्थायी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की मांग की है. उन्होंने कहा कि कई वर्षों से सिविल कोर्ट के मजिस्ट्रेट जेजे बोर्ड के प्रभार में हैं. इससे उक्त बोर्ड में मामलों के निष्पादन में विलंब होता है. [wpse_comments_template]  

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