कार्यकर्ताओं ने की पत्थरबाजी, होगी कानूनी कार्रवाई – एसएसपी
सराइकेला जिले में पदस्थापन का जिक्र किया गया
रांची पुलिस के द्वारा कहा गया कि कई कार्यकर्ता पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकते समय भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे. इस दृश्य के परिप्रेक्ष्य में मीडिया द्वारा पूछे जाने पर ही एसएसपी रांची द्वारा यह बयान दिया गया था. इसे आपत्तिजनक कहना सही नहीं होगा. अपनी जिम्मेदारियों को छोड़, झामुमो कार्यकर्ता की तरह कार्य करने के आरोप के संबंध में बता दें कि एसएसपी चंदन सिन्हा रांची जब एसपी सरायकेला-खरसावां (2017-18) के रूप में पदस्थापित थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में व्यवधान पहुंचाने का प्रयास कर रहे झामुमो कार्यकर्ताओं को कड़ाई से न केवल रोका गया था, बल्कि प्राथमिकी दर्ज कर तत्कालीन झामुमो जिलाध्यक्ष को हिरासत में भी भेजा गया था. मुख्यमंत्री का पद एक उच्चस्तरीय संवैधानिक पद है, जिसकी सुरक्षा के सभी पहलू संवेदनशील होते हैं और इसके संधारण के लिए पुलिस को दृढ़ रहना ही पड़ता है. जय हिंद. https://twitter.com/ranchipolice/status/1827665954160902233बाबूलाल ने कहा था झामुमो कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं एसपी
दरअसल बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि रांची पुलिस के एसएसपी का बेहद आपत्तिजनक वक्तव्य संज्ञान में आया है. इनकी बातों को सुनकर लगता है कि ये राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं और अपनी जिम्मेदारियों को छोड़कर झामुमो कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं. तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि हेमंत सोरेन की पत्थरबाज पुलिस ने निहत्थे महिलाओं, युवाओं पर अंधाधुंध पत्थर बरसा कर उन्हें गंभीर रूप से जख्मी करने और उकसाने का प्रयास किया. कल मेरे संबोधन के दौरान भी हेमंत सोरेन और इन जैसे अधिकारियों के इशारे पर ही निर्दोष, निहत्थे युवाओं पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए. और हां, रांची एसएसपी दिमाग में ये बात घुसा लें कि भारत माता की जय बोलने वाला सच्चा देशभक्त होता है, कोई पत्थरबाज नहीं, पत्थरबाज सत्ता के इशारे पर पत्थर फेंकने वाली हेमंत सोरेन की पुलिस है. रांची जिला में हो रहे आतंकी गतिविधियों, बांग्लादेशी मुसलमानों के घुसपैठ, आदिवासियों पर अत्याचार और निर्दोष लोगों की हत्याओं पर चुप रहने वाले एसएसपी साहब का राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह बयान देना स्पष्ट करता है कि हेमंत सोरेन ने युवाओं के आक्रोश को दबाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी झोंक दी. सत्ता तो आती जाती रहती है, लेकिन महज सत्ताधारी लोगों के गुडबुक में शामिल होने के लिए ऐसे अधिकारियों के नैतिकता का पतन देखकर दुख होता है. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/dictatorship-is-going-on-in-jharkhand-himanta-biswa-sarma/">झारखंडमें चल रहा है डिक्टेटरशिपः हिमंता बिस्वा सरमा [wpse_comments_template]
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