Ranchi: कभी झारखंड और बिहार के में खौफ का पर्याय रहे 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली सतेंद्र यादव उर्फ छोटा विकास ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना था. अब पुलिस मुख्यालय ने उसके परिवार की अगली पीढ़ी को शिक्षा से जोड़ने की पहल की है. छोटा विकास की बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च पुलिस मुख्यालय उठाया हैं.
छोटा विकास की बेटी सेंट जेवियर कॉलेज में बीएससी पार्ट-2 की पढ़ाई कर रही हैं. बताया गया है कि वह पढ़ाई में शुरू से ही बेहतर प्रदर्शन करती रही हैं और अपनी कक्षा में टॉप करती रही हैं. पुलिस मुख्यालय की ओर से फिलहाल उनकी फीस के लिए करीब 50 हजार रुपये की सहयोग राशि दी जा रही है. इसके बाद थर्ड सेमेस्टर समेत आगे की पढ़ाई का खर्च भी पुलिस मुख्यालय की ओर से वहन किया जाएगा.
इस संबंध में स्पेशल ब्रांच के डीआईजी नौशाद आलम ने सहयोग राशि से संबंधित पत्र पर हस्ताक्षर कर पुलिस मुख्यालय को भेज दिया है. जल्द ही कॉलेज में फीस की राशि उपलब्ध करा दी जाएगी. पुलिस की इस पहल का उद्देश्य सिर्फ एक पूर्व नक्सली के परिवार की मदद करना नहीं, बल्कि नक्सली संगठन में सक्रिय लोगों को मुख्यधारा में लौटने का भरोसा देना भी है.
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का मानना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. ऐसे परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इससे नक्सली संगठन में सक्रिय लोगों को भी यह संदेश देने की कोशिश है कि आत्मसमर्पण के बाद उनके बच्चों के भविष्य की चिंता पुलिस और सरकार करेगी.
गौरतलब है कि भाकपा माओवादी के बिहार-झारखंड और उत्तरी छत्तीसगढ़ स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य दिनेश यादव उर्फ चश्मा ने लातेहार में 2016 में तकलीन डीआईजी साकेत कुमार सिंह और तत्कालीन एसपी अनूप बिरथरे के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. उसे सतेंद्र यादव उर्फ छोटा विकास के नाम से भी जाना जाता है. वह पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र के भीतरडीहा गांव का रहने वाला है. राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.
पुलिस के अनुसार, छोटा विकास करीब दस वर्षों तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहा. वर्ष 1998 से 2015 के बीच पलामू, लातेहार और लोहरदगा में उसके खिलाफ करीब दो दर्जन मामले दर्ज थे. संगठन में रहते हुए उसने बिहार और छत्तीसगढ़ समेत पलामू प्रमंडल में कई घटनाओं को अंजाम दिया था. बाद में पुलिस और सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर उसने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था.
