Nitesh Ojha Ranchi : झारखंड की राजनीति इन दिनों उफान पर है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई सह दुमका विधायक बसंत सोरेन को निर्वाचन आयोग ने माइंस मामले में जो नोटिस भेजा है, उससे तरह-तरह की राजनीतिक अटकलें लगायी जा रही हैं. विपक्ष मुख्यमंत्री के कई नजदीकियों पर भी हमलावर है. वहीं बाबूलाल मरांडी के दल-बदल मामले पर भी विधानसभा स्पीकर के न्यायाधिकरण में सुनवाई हो रही है. देखा गया, इन दिनों जिन लोगों पर पूरी राजनीति केंद्रित है या जिन कार्यों को लेकर सीएम के नजदीकियों पर कथित आरोप लग रहे हैं, उन सभी के तार संथाल परगना से जुड़े हैं. सियासी गरमाहट की शुरूआत तो विधानसभा से ही उठी थी, जब बजट सत्र में जेएमएम विधायक लोबिन ह्रेम्ब्रम ने मुख्यमंत्री के एक बयान पर जोरदार हमला किया. उसके बाद जेएमएम विधायक सीता सोरेन भी अपनी ही सरकार पर हमलावर हो गयीं. इन दोनों विधायकों ने रांची से सरकार का विरोध शुरू किया. इसी तरह सरकार के जिन करीबियों पर आरोप लग रहे हैं, उनका भी संथाल से ही सीधा जुड़ाव है. यूं कहें, तो रांची से उठा झारखंड का सियासी तूफान अब संथाल परगना में केंद्रित हो गया है. इसे भी पढ़ें - गुनाहों">https://lagatar.in/sea-of-crimes-ias-pooja-singhal/">गुनाहों
का समंदर IAS पूजा सिंघल!
की बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करें)
लीज मामला : CM ने व्यक्तिगत रूप से जारी नोटिस का हाईकोर्ट में किया जवाब दाखिल [wpse_comments_template]
का समंदर IAS पूजा सिंघल!
लोबिन और सीता ने कार्रवाई की मांग राजधानी से ही उठायी
सियासी तूफान की नींव सबसे पहले संथाल के दो जेएमएम विधायकों ने रांची से रखी. 1932 के खतियान पर सीएम के सदन में दिये बयान पर लोबिन इतने नाराज हुए कि उन्होंने रांची से घोषणा कर दी कि सरकार की नीतियों के खिलाफ वे संथाल से राज्यभर का दौरा करेंगे. सीता सोरेन ने चतरा के टंडवा स्थित आम्रपाली परियोजना में कोयला के अवैध परिवहन, वनों की अवैध कटाई सहित जमीन लूट का मुद्दा उठाया. बाद में उन्होंने इस पर कार्रवाई को लेकर राज्यपाल रमेश बैस को ज्ञापन सौंपा. (रांची">https://lagatar.in/category/jharkhand/south-chotanagpur-division/ranchi/">रांचीकी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करें)
करीबियों पर खनन पट्टा लेने का लगा आरोप, सभी संथाल से
संथाल परगना में सीएम के दो करीबियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठी. पहला सीएम के बरहेट प्रतिनिधि सह जेएमएम सचिव पंकज मिश्रा पर और दूसरा उनके प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पिंटु पर. पंकज मिश्रा की कंपनी सर्वश्री महाकाल स्टोन वर्क्स के खनन पट्टा का मामला उठा, तो अभिषेक कुमार पिंटू पर आरोप लगा कि उसने शिवशक्ति इंटरप्राइजेज के नाम पर साहेबगंज के पकड़िया में 11.87 एकड़ जमीन पर पत्थर की खदान का लीज करा लिया. यानी दोनों पर आरोप की कार्यशैली संथाल परगना में ही केंद्रित रही. उसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर रांची के अनगड़ा में खनन माइंस का लीज लेने और विधायक बसंत सोरेन पर ग्रैंड माइनिंग कंपनी में पार्टनर होने (जिसपर सरकार का 8 करोड़ रुपये बकाया है) का आरोप लगा. दोनों नेता वर्तमान में संथाल से ही विधायक हैं. इसके कुछ ही दिनों बाद सीएम की पत्नी कल्पना सोरेन पर चान्हों में 11 एकड़ जमीन उद्योग भवन से लेने का आरोप लगा.बाबूलाल पर दलबदल का मामले पर सुनवाई जारी
सत्ता पक्ष के उपरोक्त लोगों के साथ अब विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी पर भी दल-बदल मामले में कार्रवाई होनी तय मानी जा रही है. विधानसभा स्पीकर के न्यायाधिकरण में शुक्रवार और 9 मई को सुनवाई होनी है. प्रदेश की राजनीति में यह चर्चा है कि सीएम और उनके भाई पर कार्रवाई का कोई फैसला आते ही बाबूलाल मामले में भी फैसला आ जाएगा. बता दें कि बाबूलाल मरांडी की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी संथाल परगना ही रही है. इसे भी पढ़ें-माइनिंग">https://lagatar.in/jharkahnd-news-mining-lease-case-cm-filed-a-reply-to-the-personally-issued-notice-in-the-high-court/">माइनिंगलीज मामला : CM ने व्यक्तिगत रूप से जारी नोटिस का हाईकोर्ट में किया जवाब दाखिल [wpse_comments_template]
Leave a Comment