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झारखंड में पोल-खोल पॉलिटिक्स, सरयू के बाद रघुवर और सुप्रियो भी बन गये जासूस

Satya Sharan Mishra Ranchi: झारखंड में पोल-खोल पॉलिटिक्स इन दिनों चरम पर है. राजनीतिक फायदे या निजी दुश्मनी निकालने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई लोग एक दूसरे की पोल खोल रहे हैं. नेताओं, मंत्रियों के घपले-घोटालों का खुलासा करने के लिए पहले सिर्फ सरयू राय जाने जाते थे, लेकिन अब तो कई राजनेता जासूस और खोजी पत्रकार बन चुके हैं. जो न सिर्फ अपने राजनीतिक विरोधियों के द्वारा की गई गड़बड़ियों का पता लगा रहे हैं, बल्कि विभागों में अंदर तक घुसकर गड़बड़ियों से संबंधित दस्तावेज निकाल ला रहे हैं. फिर पूरे आत्मविश्वास के साथ मीडिया और सोशल मीडिया पर विरोधियों को एक्सपोज कर रहे हैं. ऐसे नेताओं में अब पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य शामिल हैं. यही कारण है कि वर्तमान राजनीतिक हालात में राजधानी की पूरी मीडिया इन तीनों नेताओं को सुबह से रात तक फॉलो कर रही है. इनके प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पहुंचने वाले पत्रकारों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है, क्योंकि न जाने ये कब कौन से नया खुलासा कर दें. इसे भी पढ़ें - 2013">https://lagatar.in/difference-between-hemant-of-2013-and-2019/">2013

और 2019 के हेमंत का फर्क

एक्शन का रिएक्शन है राज्य में पैदा हुई राजनीतिक हालात

झारखंड में अभी जो राजनीतिक हालात पैदा हुए हैं, वह एक्शन का रिएक्शन है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में हुए दो गड़बड़ियों की जांच हेमंत सरकार ने एसीबी से कराने की मंजूरी दी थी. इसके बाद रघुवर दास ने भी हेमंत सरकार में हुई गड़बड़ियों को ढूंढना शुरू कर दिया. फरवरी 2022 में उन्हें पहली सफलता मिली. 10 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने खुलासा किया कि सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग कर खुद के नाम से पत्थर खदान लीज की स्वीकृति ली है. वहीं सीएम के भाई बसंत सोरेन पर ग्रैंड माइनिंग कंपनी में पार्टनर होकर दोहरा लाभ लेने का आरोप लगाया.

ढाई महीने में रघुवर का सोरेन परिवार के खिलाफ दो खुलासा

रघुवर इतने में ही शांत नहीं हुए. वे फिर मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले तलाशते रहे. एक बार फिर उन्हें सफलता मिली, अप्रैल महीने में. 25 अप्रैल को रघुवर ने फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और एक नया खुलासा किया. इस बार उनका आरोप था कि सीएम ने अपने पद का इस्तेमाल कर अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के नाम 11 एकड़ औद्योगिक भूमि आवंटित की. वहीं अपने प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद की संस्था को साहिबगंज में 11.70 एकड़ जमीन लीज पर दी और अपने विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा के फर्म महाकाल स्टोन वर्कर्स के नाम पर भी साहिबगंज के मारी मौजा में 6.25 एकड़ का खदान 2021 में आवंटित किया.

अब जेएमएम भी खंगालने लगा बीजेपी नेताओं की फाइल

रघुवर दास के किये गये खुलासों से हेमंत सोरेन और उनके परिवार की मुश्किल बढ़ती देख जेएमएम ने रघुवर को शांत करने के लिए नया दांव खेला. 30 अप्रैल को पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहते आयोजित हुए मोमेंटम झारखंड में बड़ा घोटाला हुआ है. डॉक्यूमेंट पेश करते हुए उन्होंने बताया कि जिन 11 कंपनियों के साथ करार हुआ था, वे मोमेंटम झारखंड के कुछ दिन पहले ही बने थे. उन्होंने चेतावनी वाले अंदाज में बाबूलाल से भी कहा कि उनके देश औऱ विदेश से लिंक का खुलासा जल्द किया जाएगा. अर्जुन मुंडा के खिलाफ भी दस्तावेज पेश करने की बाद सुप्रियो ने कही है. सुप्रियो की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से अबतक सत्ता पक्ष की ओर से कोई नया खुलासा नहीं हुआ है.

हेमंत सरकार में सरयू ने रखी पोल-खोल के राजनीति की नींव

हेमंत सरकार आने के बाद पोल खोल की राजनीति की सबसे पहली नींव रघुवर के सबसे बड़े विरोधी सरयू राय ने रखी. सरयू ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रघुवर के कार्यकाल में हुए टॉफी-टी-शर्ट घोटाला और पुराने मैनहर्ट मामले को लेकर दवाब बनाया. इसके बाद साल 2021 में मुख्यमंत्री की ओर से दोनों मामलों में एसीबी जांच की अनुशंसा कर दी गई. जांच लगभग पूरी हो चुकी है. सरयू राय ने सोमवार को ही कहा है कि विधानसभा में उन्हें मामले में 2 महीने के अंदर कार्रवाई करने का आश्वासन मिला है. अगर 21 मई तक जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कोर्ट जाएंगे.

बन्ना पर भी फोड़ा था कोविड बम

सरयू राय ने अपने दूसरे राजनीतिक विरोधी बन्ना गुप्ता की भी हाल ही में पोल खोली है. 13 अप्रैल को उन्होंने बन्ना पर कोविड बम फोड़ा था. उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री ने कोविड प्रोत्साहन राशि खुद भी गलत तरीके से लिया और अपने 60 स्टॉफ को भी प्रोत्साहन राशि दिलवाया. सरयू के मुताबिक, इसमें 103 करोड़ की अवैध निकासी की गई थी. बाद में उन्होंने फिर से कहा कि आरबीआई का सर्वर बंद होने की वजह से राशि भुगतान नहीं हो पायी. इसे भी पढ़ें –एलन">https://lagatar.in/gadkaris-offer-to-elon-musk-said-teslas-advantage-in-manufacturing-electric-vehicles-in-india/">एलन

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