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प्रशांत महासागर क्षेत्र में El Nino की वापसी की संभावना, भारत में इस साल कमजोर मॉनसून रहेगा!

NewDelhi : मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली कुछ एजेंसियों द्वारा इस साल प्रशांत महासागर के क्षेत्र में अल नीनो (El Nino) के वापसी की संभावना जताई गयी है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने  अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि अगर अल नीनो की वापसी से जुड़े अनुमान सही हैं तो यह भारत में इस साल कमजोर मॉनसून रह सकता है. इस कारण वित्त वर्ष 2024 में उत्पादन में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.

सरकार मानती रही थी कि रबी के मौसम में बंपर उत्पादन होगा

अब तक सरकार यह मानती रही थी कि रबी के मौसम में बंपर उत्पादन होगा.  कृषि मंत्रालय की ओर से कृषि वर्ष 2022-23 के दूसरे अग्रिम अनुमान में 11 करोड़ 21 लाख टन गेहूं के उत्पादन का दावा किया गया था, लेकिन उसके बाद से लगातार बढ़ती गर्मी की वजह से सबसे अधिक गेहूं की फसल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. स्वतंत्र एनालिटिक्स एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मार्च तक तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी होती रही तो गेहूं की पैदावार पर असर पड़ सकता है. या तो गेहूं की पैदावार पिछले रबी सीजन के स्तर पर रहेगी या उससे भी कम हो सकती है. इसे भी पढ़ें : विदेशी">https://lagatar.in/continuation-of-decline-in-forex-reserves-continues-fund-decreased-by-15-484-billion-in-three-weeks/">विदेशी

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महंगाई बढ़ने का रिस्क हमेशा बना रहेगा

अगर भविष्यवाणी सटीक हुई तो मॉनसून सीजन में होने वाली बारिश कम हो सकती है. इससे कृषि उत्पादन कम हो सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं. हालांकि वित्त वर्ष 2024 में  महंगाई में बढ़ोतरी का जोखिम है, मगर यह पूरी तरह से खत्म नहीं है. इसका कारण है कि जिस तरह से जियो पॉलिटिकल स्थिति है, ग्लोबल इकॉनमी में अनिश्चितता है, साथ ही पूरे विश्व में जिस तरह से ब्याज दरें बढ़ रही है, उससे महंगाई बढ़ने का रिस्क हमेशा बना रहेगा. इसे भी पढ़ें : स्पीकर">https://lagatar.in/read-important-news-of-the-country-and-the-world-including-jharkhand-in-your-favorite-newspaper-shubham-sandesh/">स्पीकर

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अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है

अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है. इसका दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है. इसमें समुद्र का तापमान तीन से चार डिग्री बढ़ जाता है. इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है. इसके प्रभाव से ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है. भारत में अल नीनो के कारण मॉनसून अक्सर कमजोर होता है. जिससे सूखे की स्थिति बनती है.

 सर्दियों में देश भर में 40 प्रतिशत बारिश कम हुई

मौसम विभाग के अनुसार इस साल सर्दियों के सीजन में राजधानी दिल्ली में बारिश सामान्य से 45 प्रतिशत कम हुई है. एक जनवरी से 22 फरवरी के बीच का यह आकलन है. इस दौरान राजधानी में 20.4 एमएम बारिश हुई. यह सामान्य से 16.5 प्रतिशत कम है. वहीं देश भर में इस दौरान 40 प्रतिशत बारिश कम हुई है. सबसे कम बारिश मध्य भारत में सामान्य से 86 प्रतिशत कम, पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत में 66 प्रतिशत, साउथ पेनिनसुला में 56 प्रतिशत कम और उत्तर पश्चिमी भारत में बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत कम हुई. [wpse_comments_template]

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