Ranchi : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान का नहीं, बल्कि वोट चोरी और संस्थाओं के दुरुपयोग का रहा है. आज़ादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया ही कांग्रेस की वोट-चोरी मानसिकता का सबसे बड़ा प्रमाण है.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्षों के मतदान में सरदार वल्लभभाई पटेल को 28 वोट मिले थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू को मात्र 2 वोट. इसके बावजूद लोकतांत्रिक निर्णय को दरकिनार कर नेहरू जी को प्रधानमंत्री बना दिया गया. इससे बड़ा वोट चोरी और जनमत की अवहेलना का उदाहरण देश के इतिहास में नहीं हो सकता.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देश के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया, क्योंकि न्यायालय ने पाया कि चुनाव नियमों के अनुरूप नहीं हुआ था। यह भी वोट चोरी का ही एक रूप था.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने जनता का अधिकार छीना. कहा कि 1976 में होने वाले आम चुनाव में जनता को वोट देने का संवैधानिक अधिकार था, लेकिन आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने यह अधिकार जनता से छीन लिया. यह सीधे-सीधे जनता के वोट की चोरी थी.
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सोनिया गांधी का नागरिक बने बिना मतदाता सूची में नाम दर्ज होना भी वोट चोरी का ही एक उदाहरण है, जिसे कांग्रेस ने हमेशा की तरह सत्ता के प्रभाव से दबाने की कोशिश की. 2014 के बाद देश में 74 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 44 में एनडीए को जीत मिली और 30 में विपक्ष ने जीत हासिल की.
अगर ईवीएम में खोट होती, तो विपक्ष इन 30 चुनावों में कैसे जीतता? सच यह है कि विपक्ष हारने पर बहाने ढूंढती है और जीतने पर चुप्पी साध लेती है.
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