Ranchi : आंगनबाडी के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलने वाला रेडी टू इट फूड (आरटीई) पिछले चार साल से नहीं मिल रहा है. जन्म के पहले और जन्म के बाद बच्चे कुपोषण का शिकार ना हों, इसलिए सरकार द्वारा हर आंगनवाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट फूड दिया जाता था. पिछले 4 वर्षों से आरटीई देना बंद हो गया है, जिससे गरीब वर्ग की महिलाओं और बच्चों को कुपोषण होने का खतरा बढ़ गया है. बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए प्राथमिक उपचार के तौर र रेडी टू फूड ईट दिया जाना आवश्यक है.
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रांची सदर सीडीपीओ ने क्या कहा
रांची सदर सीडीपीओ उमा सिंहा ने इस सिलसिले में पूछे जाने पर कहा कि क्षेत्र के अति कुपोषित बच्चों को एमटीसी में 15 दिनों तक रखकर उनके स्वास्थ्य पोषण की देखभाल की जाती है. बच्चे के साथ उसकी मां या कोई अन्य महिला के रहने और खाने के लिए प्रतिदिन नगद भुगतान किया जाता है. इसे भी पढ़ें –संवेदक">https://lagatar.in/complete-the-work-within-the-stipulated-time-frame-with-sensor-quality-mayor/">संवेदकगुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरा करें कार्य : मेयर [wpse_comments_template]
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