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बकाए पैसे के लिए निजी अस्पताल ने 16 घंटे तक बंधक बनाए रखा बच्चे का शव

Ranchi : अगर निजी अस्पताल में इलाज कराना है तो आपकी जेब में पैसे होने चाहिए. नहीं तो आपको  कुछ ऐसी तकलीफ से गुजरना पड़ सकता है, जो पलामू जिले के उपरीकला के रहने वाले अर्जुन मेहता को झेलनी पड़ी है. पांच अप्रैल को अर्जुन के आठ वर्षीय छोटे बेटे अभय को उसके गांव में बाइक सवार ने धक्का मार दिया. इस घटना में अभय बुरी तरह घायल हो गया.

परिजन बेहतर इलाज की आशा में अभय को लेकर आनन-फानन में रांची के बरियातू स्थित हेल्थ पॉइंट अस्पताल पहुंचे. यहां उसे छह अप्रैल को भर्ती किया गया. इलाज के नाम पर हेल्थ पॉइंट अस्पताल ने परिजनों से 80 हजार रुपए जमा करने के लिए कहा. परिजन किसी तरह अपने सगे-संबंधियों से 80 हजार रुपए का इंतजाम कर पैसे का भुगतान भी कर दिया, लेकिन इलाज के दौरान शुक्रवार को अभय की मौत हो गयी. हेल्थ पॉइंट अस्पताल के कर्मचारियों ने 87 हजार रुपए की भुगतान के बाद शव देने की बात कह रहे थे.

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हेल्थ प्वाइंट अस्पताल

रात 1.30 बजे बच्चे की हो गई मौत

अभय के चाचा शंकर मेहता ने कहा कि गुरुवार को शाम 4:00 बजे बच्चे को देखने गया था. बच्चे के शरीर में मूवमेंट था. अस्पताल की नर्स ने एबीजी ब्लड टेस्ट के नाम पर बिल करवाया. रात 8:00 बजे फिर बच्चे को देखने गया है, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी. जबकि अस्पताल प्रबंधन ने शुक्रवार की देर रात 1:30 बजे मौत होने की बात कहते हुए 87 हजार का भुगतान करने के बाद शव देने की बात कह रहे थे.

अस्पताल के कर्मचारी करते रहे दुर्व्यवहार

वहीं मृतक के पिता अर्जुन मेहता ने कहा कि जब बच्चे को देखने जाता था तो अस्पताल के कर्मचारी दुर्व्यवहार करते थे. बच्चे को खून की जरूरत होने की बात कहकर अस्पताल प्रबंधन ने चार यूनिट खून भी लिया, लेकिन खून नहीं चढ़ाया गया. पैसे की मांग करते हुए 16 घंटे तक शव को बंधक बनाए रखा.

नहीं की है पैसे की मांग, 25 हजार भुगतान के बाद शव छोड़ा

वहीं हेल्थ प्वाइंट अस्पताल के प्रबंधक गोपाल कुमार का कहना है कि मौत के बाद हमने परिजन को एंबुलेंस का इंतजाम करने के लिए कहा था. बिना पैसे लिए हुए भी इलाज किया. शव छोड़ने के लिए कोई पैसे की मांग नहीं की गई. हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है उसका बिल बकाया था. मीडिया के हस्तक्षेप के बाद मृतक के परिजनों से 25 हजार रुपए की वसूली की गई. इसके बाद शव को ले जाने दिया गया.

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