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चाकुलिया के काजू से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में चलते हैं प्रोसेसिंग प्लांट

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Chakulia : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया वन क्षेत्र में काजू की खेती होती है. लेकिन यहां काजू का प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है. यहां उत्पादित काजू से पश्चिम बंगाल और ओडिशा के प्रोसेसिंग प्लांट चलते हैं. क्षेत्र में काजू का एक भी प्रोसेसिंग प्लांट नहीं है. इसलिए यहां उत्पादित करोड़ों रुपए का काजू पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बेचा जाता है. काजू के क्षेत्र में यहां रोजगार की असीम संभावनाएं हैं, परंतु इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. पूर्वी सिंहभूम का चाकुलिया वन क्षेत्र जिसमें चाकुलिया, बहरागोड़ा, धालभूमगढ़ प्रखंड  और घाटशिला प्रखंड का कुछ अंश आता है, जो कि काजू उत्पादन में राज्य में अव्वल स्थान रखता है. चाकुलिया वन क्षेत्र में लगभग 3000 हेक्टेयर वन भूमि पर काजू के वृक्ष हैं. एक आकलन के मुताबिक रैयत भूमि पर भी लगभग 1000 हेक्टेयर में काजू के वृक्ष हैं. यहां की मिट्टी काजू के लिए उपयुक्त मानी जाती है. वन भूमि पर स्थित काजू वनों की वर्ष 1998 तक वन विभाग द्वारा नीलामी की जाती थी, परंतु इसके बाद से काजू बीज का संग्रह वन सुरक्षा समिति द्वारा किया जाता है.

75 से 100 रुपए प्रति किलो पश्चिम बंगाल के व्यापारियों को बेच दिया जाता है

काजू प्रोसेसिंग प्लांट और उचित बाजार के अभाव में संग्रहित काजू बीज औने-पौने दाम पर  बेच दिया जाता है. काजू 75 से सौ रुपए प्रति किलो समितियों द्वारा पश्चिम बंगाल के व्यापारियों को बेचा जाता है. क्षेत्र में काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगे तो सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार प्राप्त होगा. जनवरी से लेकर मार्च तक काजू का मौसम रहता है. वैसे तो विगत तीन साल पूर्व वन विभाग द्वारा चाकुलिया और बहरागोड़ा में मिनी काजू प्रोसेसिंग प्लांट खोला गया था. इन्हें संचालित करने का जिम्मा संबंधित क्षेत्र की वन सुरक्षा समिति को दिया गया था, परंतु किन्ही कारणों से दोनों प्लांट बंद पड़े हैं. ऐसे में यहां उत्पादित करोड़ों मूल्य के काजू बीज पश्चिम बंगाल में ही बेचा जाता है.

राज्य सरकार की उदासीनता से नहीं खुला अब तक प्रोसेसिंग प्लांट

वन विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा काजू प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की लिए कई बार पहल की गई, परंतु राज्य सरकार की उदासीनता से कोई नतीजा नहीं निकला. काजू के संदर्भ में एक खास बात यह भी है कि उचित रख-रखाव के अभाव में वन भूमि पर स्थित काजू वनों में काजू के वृक्ष नष्ट हो रहे हैं. दीमक समेत अन्य कीड़े-मकोड़ों के प्रभाव से और गर्मी के दिनों में आग लगी से काजू के वृक्ष धीरे-धीरे नष्ट हो रहे हैं. काजू वृक्षों के रख-रखाव पर वन विभाग और सरकार की कोई योजना नहीं है. यदि स्थानीय किसानों को देखरेख की जिम्मेदारी दी जाए तो बहुत हद तक यह समस्या दूर हो जाएगी.

विधानसभा में प्रश्न उठाया था : समीर महंती

बहरागोड़ा के झामुमो विधायक समीर महंती ने कहा कि काजू प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए उन्होंने पहल की है. उन्होंने विधानसभा में प्रश्न उठाया था और सरकार से प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की मांग की है. प्रोसेसिंग प्लांट खोलने से यहां के बेरोजगारों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और उनकी आय भी बढ़ेगी. चाकुलिया के वन क्षेत्र पदाधिकारी दिग्विजय सिंह ने कहा कि काजू प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे. वन विभाग ने मिनी काजू प्रोसेसिंग प्लांट खोलकर एक पहल की थी, परंतु किन्हीं कारणों से सफल नहीं हुआ. इसे दोबारा शुरू करने की पहल की जाएगी. [wpse_comments_template]

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