Ranchi : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग ने अंतर विषयक शोध में अभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया. इसका उद्देश्य शोधार्थियों में शोध कौशल का विकास करना है. कार्यक्रम में शामिल तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रो एपी दास ने कहा कि शोध का तब तक कोई महत्व नहीं है, जब तक इसका प्रयोग उत्पाद, नियम और प्रैक्टिसेज के रूप न किया जाये. वर्तमान समय में अनुसंधान को प्रोत्साहित नहीं किया जाता है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने इस कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को आत्मसात करने और इसे अपने शोध प्रयासों में लागू करने का आग्रह किया. कहा कि अपने कौशल और योग्यता को बढ़ाने के साथ खुद को अपडेट रखना चाहिए. एक मोमबत्ती दूसरी मोमबत्ती को तभी जला सकती है, जब वो खुद जल रही हो. कार्यक्रम में डॉ एम रामकृष्णा रेड्डी, डॉ विनय कुमार यादव, डॉ शिल्पी राज, डॉ. विमल किशोर, डॉ. मानवी यादव, डॉ विजय कुमार यादव और डॉ. नीरा गौतम शामिल रहे. इसे भी पढ़ें – समाज">https://lagatar.in/major-role-of-women-in-organizing-the-society-enos-ekka/">समाज
को संगठित करने में महिलाओं की प्रमुख भूमिका : एनोस एक्का [wpse_comments_template]
सीयूजे में शोध अभ्यास पर कार्यक्रम

Leave a Comment