Ranchi : शेल्टर होम्स के स्टाफ को 14 महीने से नहीं मिली सैलरी. अपनी मांगों के लिए देना पड़ा धरना. वेतन देने की लगाई गुहार. झारखंड अगेन्स्ट ह्यूमन ट्रैफिकिंग नेटवर्क ने पिछले 14 माह से शेल्टर होम्स के स्टाफ को वेतन नहीं देने के विरोध में सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया. शुक्रवार को मोरहाबादी में बापू वाटिका के सामने धरना दिया गया. संघ के प्रदेश संयोजक राजा दूबे ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा ह्यूमन ट्रैफिंकिंग से बचाए गए बच्चों के लिए शेल्टर होम्स बनाए गए हैं. इन शेल्टर होम्स का संचालन एनजीओ की मदद से किया जाता है. पिछले 14 महीनों से एनजीओ सफलतापूर्वक इन ओपेन शेल्टर होम्स का संचालन कर रहा है. पर पदाधिकारियों द्वारा इन होम्स के संचालन और स्टाफ के पेमेंट में टाल-मटोल किया जा रहा है. सरकार से हमारी मांग है कि शेल्टर होम के काम करने वाले सभी स्टाफ का बकाया पेमेंट किया जाए. साथ ही अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. हमारी मांगों के लिए सरकार के सकारात्मक पहल के लिए हम पांच दिन इंतजार करेंगे. इसके बाद हम बच्चों के साथ राजभवन मार्च करेंगे. इसे भी पढ़ें : बेरमो:">https://lagatar.in/bermo-dvc-united-front-demonstrates-11-point-demands-received-assurance/26560/">बेरमो:
डीवीसी संयुक्त मोर्चा ने 11 सूत्री मांगों को लेकर किया प्रदर्शन, मिला आश्वासन
के बाद भी मजदूरों को 20 लाख का भुगतान नहीं
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कर्ज लेकर संस्था कर रही बच्चों का पालण-पोषण
आंदोलन में शामिल सीमा ने बताया कि शेल्टर होम के संचालन का पैसा रोकने से इसका संचालन करने वाले संस्था के स्टाफ और बच्चों को काफी परेशानी हो रही है. ये संस्थाएं कर्ज लेकर इनका संचालन और बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. आने-जाने तक का भाड़ा हमें नहीं दिया जा रहा. शेल्टर होम में हर जाति-वर्ग के बच्चे रहते हैं. हर किसी के पर्व-त्योहार और जन्मदिन का ख्याल रखना पड़ता है. और इन सबके लिए हम कर्ज लेने पर मजबूर हैं.अधिकारी नहीं कर रहे पैसों का भुगतान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रांची के जिला बाल संरक्षण इकाई में बैठे पदाधिकारी सरकार द्वारा बच्चों के शेल्टर होम के लिए दिए जा रहे पैसों को भुगतान नहीं किया जा रहा है. शेल्टर होम्स के पास बच्चों के लिए खाने तक के पैसे नहीं हैं. सरकारी द्वारा इसके लिए हर वर्ष आवंटन आता है, पर अधिकारी इसका भुगतान नहीं कर रहे.रेस्क्यू किए गए 700 से अधिक बच्चे रहते हैं शेल्टर होम्स में
शेल्टर होम्स में नक्सलियों और बाल विवाह से बचाए गए बच्चे, कूड़ा-कचड़ा उठाने वाले, भीख मांगने वाले सहित अन्य कई ऐसे बच्चे रहते हैं, जिनके मां-बाप का पता नहीं है. रांची में शेल्टर होम में रह रहे ऐसे बच्चों की संख्या लगभग 700 से भी अधिक है. वहीं पूरे राज्य में ऐसे हजारों बच्चे है. सरकार अलग-अलग जगहों से बच्चों को रेस्क्यू कर शेल्टर होम में ला रही है, पर इनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी नहीं उठी रही. सरकार ने उनका जिम्मा उठाने की बात कहीं भी थी. धरने में मुख्य रूप से राजा दूबे, रितेश कुमार, सीता सुआसी, जहाना परवीन, अख्तरी बेगम, सूरज कुमार, अजय कुमार यादव सहित अन्य शामिल थे. इसे भी पढ़ें : मजदूरी">https://lagatar.in/20-lakhs-are-not-paid-even-after-getting-wages-gomia-laborers-are-suffering/26562/">मजदूरीके बाद भी मजदूरों को 20 लाख का भुगतान नहीं
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