पूर्वजों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे : डॉ करमा उरांव
आदिवासी मूलवासी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष डॉ करमा उरांव ने कहा कि अलग राज्य की लड़ाई छह दशक चली. हम अपने पूर्वजों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे, हम लड़ेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अंतू तिर्की, प्रेम शाही मुंडा, राजू महतो, आजम अहमद, फूलचंद तिर्की, शिवा कच्छप, लोहरमेन उरांव आदि लोग उपस्थित रहे.डॉ. उरांव के सात प्रश्नों को मिला समर्थन
इससे पहले आदिवासी मूलवासी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. करमा उरांव ने प्रदर्शनकारियों के बीच सात प्रश्न रखे, जिसे सर्वसम्मति से समर्थन मिला. ..- स्थानीय एवं नियोजन नीति तुरंत परिभाषित की जाये, जिसमें 1932 के खतियान या अंतिम सर्वे रिकार्ड को प्रमुख आधार माना जाये. राज्य की मुख्य भाषा, संस्कृति, जीवनशैली एवं परंपराओं की जानकारी भी प्रमुख शर्तों में हो.
- राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त किया जाये. राज्य बनने के साथ ही शासन एवं प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार प्रखंड से लेकर राज्य सचिवालय तक व्याप्त है. वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का उद्योग चरम पर है.
- राज्य में रिक्त पड़े विभिन्न संवर्गीय पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया विधि सम्मत शुरू की जाये.
- जेपीएससी की वर्तमान संयुक्त पीटी परीक्षा में भारी अनियमितता बरती गयी है, जिसके लिए पूरी तरह से अध्यक्ष जिम्मेवार हैं. उन्हें पद से हटाने के लिए राज्यपाल और मुख्यमंत्री पहल करें. पीटी परीक्षा अविलंब रद्द की जाये.
- राज्य में विस्थापन और पुनर्स्थापन आयोग का गठन हो. मॉब लींचिंग के लिए कड़े कानून बनाये जाएं. मछुआरा एवं अन्य सीमांतक जातियों के आर्थिक विकास के लिए नीति बनायी जाये.
- राज्यपाल भारत सरकार से अनुरोध करें कि वह राज्य में ऐसे आईएएस, आईपीएस पदाधिकारियों की पदस्थापना करे, जिन्हें भाषा, संस्कृति और अन्य परिस्थितियों की जानकारी हो.
- राज्य में उद्योग नीति ऐसी बने, जिसमें यहां के उद्योगपति, व्यवसायी एवं अन्य कारोबारियों को आर्थिक सहायता एवं अन्य सुरक्षा, उनके संवर्धन, संरक्षण की दिशा में गारंटी मिले, जिससे यहां के उद्यमियों को आगे बढ़ने का मौका मिले.
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