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कुड़मी समाज का धरना-प्रदर्शन जारी, रेल-सड़क यातायात पर असर

Ranchi :    कुड़मी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन रविवार यानी पांचवें दिन भी जारी रहा. हालांकि राज्य सरकार से आश्वासन के बाद पश्चिमी बंगाल के पुरुलिया जिले के कुस्तौर और खड़गपुर के खेमाशुली में रेलवे ट्रैक खाली कर दिया है. रेलवे ने एक नोटिफिकेशन भी जारी किया, जिसमें इस रूट में ट्रेनों के परिचालन की बात कही गई. पर आंदोलनकारियों के पुरुलिया के कोटशिला स्टेशन पर जुटने और प्रदर्शन करने से आंदोलन को लेकर संशय बना रहा. हालांकि देर रात कोटशिला में भी रेलवे ट्रैक खाली कर दिया गया.आदिवासी कुड़मी समाज के अजीत महतो गुट ने कहा है कि आंदोलन जारी रहेगा. सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया है, लेकिन वे नहीं जाएंगे. राजेश महतो गुट पश्चिम बंगाल कुड़मी समिति के अध्यक्ष हैं, जो वार्ता लिए जाने को तैयार हो गए हैं. अजीत गुट झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्र के कुड़मियों का नेतृत्व कर रहे हैं. शुभम संदेश की टीम ने जानकारी हासिल की है. पेश है रिपोर्ट:

चाईबासा

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संवैधानिक लड़ाई लड़ी जा रही है : देवेंद्र

चाईबासा कुड़मी के सदस्य देवेंद्र महतो का कहना है कि कुड़मी का आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से किया जा रहा है. इसमें किसी अन्य समुदाय को विरोध नहीं करना है. हमें खुशी मिल रही है कि अन्य समुदाय भी हमारे साथ खड़े होकर इस विरोध में सहयोग कर रहे हैं. यह संवैधानिक लड़ाई लड़ी जा रही है. आंदोलन एक दिन का नहीं है. बरसों से आंदोलन चलता आ रहा है. सरकार की नजर होने के बावजूद भी आंदोलन का समर्थन नहीं कर रही है. सरकार से मांग है कि अविलंब इसमें सहयोग करें. जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं तब तक इस तरह का आंदोलन जारी रहेगा. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHAIBASA-SUKANTI-MAHATO_330-150x150.jpg"

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षड्यंत्र कर सूची से हटा दिया गया : सुकांति

मनोहरपुर की सुकांति कुमारी महतो कहती हैं कि देश आजाद होने से पहले कुड़मी जनजाति के लोगों को आदिवासी का दर्जा प्राप्त था. लेकिन जैसे ही आजादी के बाद नया नियम बनाया गया, उस समय कुड़मी को एसटी की सूची से षड्यंत्र के तहत हटा दिया गया. अब दोबारा उसी सूची में शामिल करने को लेकर जोरदार आंदोलन जारी है. सरकार को हमारी मांगें माननी चाहिए. बरसों से यह आंदोलन चल रहा है. आज भी कुड़मी समुदाय के लोग ग्रामीण क्षेत्र में आदिवासी की तरह परंपरागत तरीके से जी रहे हैं, लेकिन सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHAIBASA-KHIROD-MAHATO_859-150x150.jpg"

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सरकार मांगें पूरी करे : खिरोद महतो

रोलाडीह हाई स्कूल के पूर्व प्रधानाध्यापक खिरोद महतो कहते हैं कि बंगाल में लोकतांत्रिक तरीके से कुड़मी समुदाय की ओर से आंदोलन चलाया जा रहा है. सरकार को आगे आकर जो मांगे हैं उसको पूरा करने की जरूरत है. लगातार आंदोलन होने के बावजूद भी सरकार इस पर गंभीर नहीं है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. बरसों से एसटी की मांग को लेकर लड़ाई लड़ी जा रही है. लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है. राजनीतिक दल अपने लाभ के लिए समाज का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन समाज का अधिकार का हनन किया जा रहा है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHAIBASA-SACHIN-MAHATO_606-150x150.jpg"

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सरकार मानने को तैयार नहीं : सचिन

पश्चिमी सिंहभूम कुड़मी समाज के केंद्रीय सदस्य सचिन महतो कहते हैं कि कुड़मी समाज की ओर से अब दूसरी बार रेल रोको आंदोलन किया जा रहा है. पहली बार रेल रोको आंदोलन में जो समझौता हुआ था, उसे सरकार मानने को तैयार ही नहीं है. सरकार समाज को ठगने का काम कर रही है. आज भी गांव क्षेत्र में आदिवासी रीति रिवाज परंपरा के तहत कुड़मी समुदाय के लोग निवास करते हैं, लेकिन सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है. सरकार एक सर्वे करा ले. सर्वे के आधार पर कुड़मी को जनजाति में शामिल करे. बशर्ते ये होना चाहिए कि सर्वे में किसी तरह की गड़बड़ी ना हो. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/Untitled-5-copy-8-150x150.jpg"

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सभी को समर्थन की जरूरत है : विनोद

कुड़मी समाज के सदस्य विनोद महतो कहते हैं कि कुड़मी के इस आंदोलन को आगे आकर हर किसी को समर्थन करने की जरूरत है. जब तक लोगों का समर्थन नहीं मिलेगा, तब तक हमें आंदोलन में सफलता नहीं मिलेगी. सरकार से हमारी मांग जायज है. इसमें किसी तरह का खेल नहीं है. बरसों से हमारी मांगें चल रही हैं, लेकिन सरकार इसे नजरअंदाज करने में लगी है. आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन होगा. ग्रामीण क्षेत्र तक इस आंदोलन को पहुंचाने की जरूरत है. हमारी रीति रिवाज परंपरा सब आदिवासी रीति रिवाज से मिलती-जुलती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHAIBASA-RAJENDR-MAHATO-1_981-150x150.jpg"

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अन्य स्थानों पर भी आंदोलन होगा : राजेंद्र

कुड़मी समाज के केंद्रीय सदस्य राजेंद्र महतो कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के रेल रोको आंदोलन तेज करने की जरूरत है. जब तक आंदोलन का रूप जोरदार तरीके से नहीं लेगा, तब तक हमें अधिकार नहीं मिलेगा. आज भले ही लोगों को परेशानी हो रही हो, लेकिन हमारा समुदाय भी अन्य समुदाय के आंदोलन का समर्थन करता है. समुदाय के लोगों के प्रति आभार है. आने वाले दिनों में अन्य स्थानों में भी रेल रोको आंदोलन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. वर्तमान समय में जिस तरह का रूप लिया है पूरे देश में सरकार के प्रति नाराजगी दिख रही है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/आभा-महतो-150x150.jpg"

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लचीला रूख अपनाना चाहिए : आभा महतो

पूर्व सांसद आभा महतो ने कहा कि आंदोलन हर समस्या का समाधान नहीं है. लेकिन परेशानियां झेलते हुए लोग आंदोलन कर रहे हैं. रही बात आम लोगों को हो रही परेशानी की तो, इसके लिए एक पक्ष जिम्मेवार नहीं है. कहीं न कहीं सरकार भी उत्तरदायी है. वर्षों पुरानी मांग को अनसुना करना जायज नहीं है. सरकार को कुड़मी समाज की मांगों पर लचीला रुख अपनाना चाहिए. आर्थिक नुकसान दोनों पक्षों का हो रहा है. साथ ही आंदोलन कर रहे लोगों को भी आम लोगों को हो रही परेशानियों को देखते हुए कोई रास्ता निकालना चाहिए. तभी समाधान हो सकता है.

चक्रधरपुर

आंदोलन के कारण रेलवे स्टेशन की दुकानें बंद, बढ़ी मुसीबत

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alt="" width="1200" height="800" /> कुड़मी समाज को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन के कारण भीड़-भाड़ रहने वाला चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा है. रेलवे स्टेशन पर खानपान, किताबें आदि के काउंटर और दुकानें बंद हो गई हैं. ट्रेनों का परिचालन बंद होने से स्टेशन पर यात्री नहीं आ रहे हैं. इससे पूरे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ है. स्टेशन व स्टेशन के बाहर के दुकानदारों की मुसीबतें बढ़ गई हैं. इसके कारण कई दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद रखनी पड़ी है. स्टेशन के वेंडरों ने बताया कि अगर यही हाल एक सप्ताह तक रहा तो स्थिति बद से बदतर होने लगेगी. रेलवे स्टेशन के बाहर यात्रियों को ले जाने के लिए लगने वाले ई-रिक्शा, रिक्शा, ऑटो चालकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्टेशन के बाहर गाड़ी चालकों को दिनभर यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है. यही हाल स्टेशन के बाहर लगने वाले चाय काउंटर, खानपान के अन्य सामान के दुकानदारों का भी है. खासकर रोजाना कमाने खाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हुई हैं.

स्टेशन पहुंचने वाले लोग लौट रहे वापस

ट्रेनों के रद्द होने की जानकारी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र के लोग स्टेशन तो पहुंचते हैं, लेकिन ट्रेनों के रद्द रहने की जानकारी मिलने पर गांव लौटना पड़ रहा है. चक्रधरपुर के देवगांव में अपनी मां के घर मागे पर्व मनाने पहुंची चारीबा कर्मकार अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कोलकाता जाने के लिए ट्रेन पकड़ने रेलवे स्टेशन पहुंची थी, लेकिन उन्हें यह पता चला कि ट्रेनें रद्द हैं. इससे वे काफी मायूस होकर अपने परिवार के साथ पुनः मायके लौट गईं. उन्होंने बताया कि मुझे जानकारी नहीं थी कि ट्रेन रद्द है. कोलकाता के कचरापाड़ा में हमारा घर है. वहीं हमारा रोजगार भी है. अगर तीन-चार दिनों के भीतर घर नहीं लौटे तो परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/ऑटो-चालक-संदीप-तांती-चक्रधरपुर-150x150.jpg"

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ऑटो चालक सुबह से खड़े रहते हैं : संदीप तांती

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर ऑटो लगाने वाले ऑटो चालक संदीप तांती ने कहा कि ट्रेनों के नहीं चलने के कारण यात्रियों की आवाजाही नहीं हो रही है. इससे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सुबह से लेकर शाम तक ऑटो खड़ा कर यात्रियों का इंतजार करते हैं. भाड़े पर ऑटो होने के कारण गाड़ी नहीं चलने पर भी मालिक को पैसा देना पड़ रहा है, जिससे समस्या बढ़ गई है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/टी-स्टॉल-के-दुकानदार-राजेश-गुप्ता-चक्रधर-पुर-150x150.jpg"

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दुकान नहीं चलने के कारण हो रहा नुकसान : राजेश

चक्रधरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर चाय की दुकान लगाने वाले राजेश गुप्ता ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ नहीं होने के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है. पूर्व में लाए गए सामान बर्बाद हो रहे हैं. दुकान नहीं चलने के कारण आर्थिक परेशानियां उठानी पड़ रहा हैं. अब तो लगता है कि आंदोलन लंबा चला तो मुश्किल होगी. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/करण-महतो-चक्रधर-पुर-150x150.jpg"

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मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन : करण महतो

टोटेमिक कुड़मी समाज के सचिव चक्रधरपुर निवासी करण महतो ने कहा कि हमारी मांगें जब तक पूरी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. हमारी मांग संवैधानिक है. सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने को लेकर ही आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ रहा है, अन्यथा हम आंदोलन नहीं करते. हमारी मांगें जायज हैं. इसे लेकर ही आंदोलन दिन प्रतिदिन तेज हो रहा है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/दुर्योधन-महतो-चक्रधर-पुर-150x150.jpg"

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मांगों पर जल्द फैसला ले सरकार : दुर्योधन महतो

कुड़मी समाज के दुर्योधन महतो ने कहा कि सरकार हमारी मांगों पर जल्द से जल्द फैसला ले. हमारी मांग काफी पुरानी है. इस बात की जानकारी सरकार को है. आंदोलन से कुछ लोगों को परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन हर आंदोलन के बाद परिणाम जरूर निकलता है. इसका परिणाम भी बेहतर ही होगा और बड़ी संख्या में लोगों को इसका लाभ मिलेगा.

चक्रधरपुर से कुड़मी समाज के लोग खेमाशुली रवाना

पश्चिमी बंगाल के खेमाशुली रेलवे स्टेशन पर कुड़मी समाज के चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए चक्रधरपुर से रविवार को आदिवासी कुड़मी समाज व टोटेमिक कुड़मी समाज के बैनर तले बड़ी संख्या में समाज के लोग खेमाशुली गए. जहां आंदोलन में शामिल होकर इसे तेज करने का निर्णय लिया. खेमाशुली जाने वालों में टोटेमिक कुड़मी समाज के सचिव करण महतो, संरक्षक रोमित कटियार, आदिवासी कुड़मी समाज के संगठन सचिव रवि महतो, दीपक महतो समेत अन्य शामिल थे.

जमशेदपुर

कई ट्रेनें रद्द,स्टेशनों पर पसरा है सन्नाटा

कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन के कारण जन जीवन बुरी तरह प्रभावित है. खेमाशुली में आंदोलनकारी जमे हुए हैं. कोटशिला में आंदोलन रविवार से शुरू किया गया है. खेमाशुली में आंदोलन के कारण टाटानगर स्टेशन आने वाली अधिकांश ट्रेनें विगत पांच दिनों से रद्द हैं. यात्रियों की आवाजाही नहीं होने के कारण स्टेशन वीरान हो गया है. स्टेशन पर फूड एवं स्नैक्स स्टॉल लगाने वाले लोगों की माली हालत खराब हो गई है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/LEELA-PATAR_607-150x150.jpg"

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प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के प्रतीक्षालय हैं वीरान : लीला

टाटानगर स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म पर स्थित प्रथम एवं द्वीतीय श्रेणी प्रतीक्षालय इन दिनों वीरान है. ट्रेनों का आवागमन नहीं होने के कारण प्रतीक्षालय में यात्री नहीं आ रहे हैं. प्रतीक्षालय का संचालन जिनियस इंफोटेक एजेंसी करती है. एजेंसी की रिसेप्सनिस्ट लीला पातर ने बताया कि विगत पांच दिनों से यात्रियों के नहीं आने के कारण प्रतीक्षालय वीरान है. दोनों प्रतीक्षालय वातानुकूलित हैं. प्रथम श्रेणी प्रतीक्षालय की सीटिंग क्षमता 60 है. इसके अलावे 10-10 सीट का दो पारिवारिक केबिन भी हैं.लेकिन यात्रियों के नहीं आने के कारण प्रतीक्षालय खाली पड़े हैं.

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alt="" width="150" height="150" />शौचालय का उपयोग नहीं होने से कमाई बंद हुई : दीपक पांडेय

टाटानगर स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म पर प्रथम श्रेणी प्रतीक्षालय में शौचालय के स्टाफ दीपक पांडेय ने बताया कि कुड़मी समाज के आंदोलन के कारण गिने चुने यात्री आ रहे हैं. इसके कारण शौचालय का उपयोग नाममात्र का हो रहा है. पांच दिन पहले तक प्रतिदिन एक सौ से डेढ़ सौ यात्री शौचालय का उपयोग करने आते थे. इससे स्टाफ खर्च निकल जाता था. लेकिन पांच दिनों से दिनभर में दो-चार लोग ही आ रहे हैं. इसके कारण स्टाफ का मेहनताना निकालना भी मुश्किल हो गया है. शौचालय में यूरिनल का इस्तेमाल निःशुल्क है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/VINAY-KUMAR_843-150x150.jpg"

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मुश्किल से हो पाती है हमारी कमाई : विनय कुमार

टाटानगर स्टेशन पर मेसर्स एक्सप्रेस फूड सर्विस के टी-स्टॉल के स्टाफ विनय कुमार ने बताया कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन के कारण स्टॉल पर खाद्य पदार्थों की बिक्री पूरी तरह बंद हो गई है. यात्रियों के नहीं आने के कारण किसी-किसी दिन बोहनी भी मुश्किल से हो पाती है. चूंकि टी-स्टॉल रेल यात्रियों पर ही निर्भर है. यात्रियों के नहीं आने के कारण बिक्री पूरी तर ठप है. उन्होंने कहा कि बिक्री हो या न हो एजेंसी का स्टाफ होने के नाते प्रतिदिन स्टॉल खोलना पड़ता है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/KAMDEO-MAITY_475-150x150.jpg"

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अब तो स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है: कामदेव मैती

टाटानगर स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर टी-स्टॉल के स्टाफ कामदेव मैती ने बताया कि यात्रियों के नहीं आने के कारण चाय-पानी की बिक्री पूरी तरह बंद है. पांच दिनों से स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल है. रेलवे के नियमों के तहत स्टॉल बंद नहीं कर सकते. इसलिए प्रतिदिन स्टॉल खोलना पड़ता है. उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि आम लोगों के रोजी-रोजगार को देखते हुए आंदोलन वापस लेने पर विचार करें. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/SITARAM-KUSHWAHA-STATION_499-150x150.jpg"

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बिक्री प्रभावित हुई है : सीताराम कुशवाहा

टाटानगर स्टेशन के आउट गेट के बाहर गुमटी लगाकर चाय बेचने वाले सीताराम कुशवाहा ने बताया कि ट्रेनें रद्द रहने के कारण यात्रियों की आवाजाही काफी कम हो गई है. उनका कारोबार यात्रियों पर ही निर्भर है. यात्रियों के नहीं आने के कारण बिक्री प्रभावित हुई है. उन्होंने बताया कि उनका परिवार इसी पर निर्भर है. अभी पांच दिनों से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है. उन्होंने सरकार से आंदोलन कर रहे लोगों से वार्ता कर हल निकालने की अपील की. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/PARTHO-MAHANTY_140-150x150.jpg"

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रोज खराब हो रहे हैं खाने-पीने के समान : पार्थो महंती

टाटानगर स्टेशन के एक नंबर प्लेटफार्म पर यात्रियों के खाने-पीने के होटल (कृष्णा फूड प्लाजा) के संचालक पार्थो महंती ने बताया कि ट्रेनों की आवाजाही बंद होने के कारण फूड प्लाजा काफी प्रभावित हुआ है. प्रतिदिन यात्रियों के लिए नास्ता एवं खाना तैयार किया जाता है. लेकिन ग्राहकों के नहीं आने के कारण खाद्य पदार्थ बेकार हो रहा है. खराब होने के कारण कई पदार्थों को डस्टबिन में डालना पड़ता है. उन्होंने बताया कि फूड प्लाजा के संचालन के लिए कई स्टाफ रखे गए हैं. लेकिन कारोबार प्रभावित होने का कारण उनका दैनिक खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/PRANAV-MAHTO-TMC-LEADER_118-150x150.jpg"

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आंदोलन के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों दोषी : प्रणव महतो

कुड़मी छात्र युवा मोर्चा के संरक्षक प्रणव महतो ने कहा कि कुड़मी समाज के आंदोलन के लिए बीजेपी एवं कांग्रेस दोनों समान रूप से दोषी हैं. सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कुड़मी को सिर्फ छला है एवं केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है. दूसरी ओर बीजेपी भी सत्ता में रहते हुए आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं दिया. कुड़मी समाज स्वतंत्रता के पूर्व 1931 तक जनजाति की श्रेणी में शामिल था. 1950 में अज्ञात कारणों से तत्कालीन सरकार द्वारा बनाए गए सूची से कुड़मी समाज को बाहर कर दिया गया. जमशेदपुर सांसद ने कुड़मी आंदोलन पर कहा ‘नो कमेंट’ : जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने कुड़मी समाज के रेल रोको आंदोलन पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार किया है. उन्होंने कहा है कि आंदोलन के संबंध में समाज के लोग ही प्रतिक्रिया दे सकते हैं.

हजारीबाग

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मामले को गंभीरता से समझे : जयप्रकाश

कुड़मी-आदिवासी आंदोलन समिति के नेता रहे पूर्व जिला परिषद सदस्य जयप्रकाश सिंह पटेल कहते हैं कि सरकार इस मामले को गंभीरता से समझे. वर्ष1891 में इसीलिए जनजाति यानी ट्राइब स्टेट्स दिया गया, कास्ट नहीं. 1908 में उनकी जमीन सीएनटी एक्ट के तहत संरक्षित की गई. वर्ष 1913 में इंडियन सक्शेसन एक्ट के बहुत से प्रावधानों से अलग रखा गया. ऐसे में कुड़मी को आदिवासी का दर्जा मिलना ही चाहिए. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/BALESHWAR-MAHTO-1_950-150x150.jpg"

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गजेटियर में भी है जिक्र : बालेश्वर

कुड़मी-आदिवासी आंदोलन समिति के सदस्य बालेश्वर महतो ने कहा कि छोटानागपुर पठार आदिकाल से आदिवासियों का निवास स्थान रहा है. यहां हो, मुंडा, संथाल, उरांव आदि जनजातियों के साथ कुरमी/कुड़मी जन जाति भी आदि काल से साथ साथ रहते आ रहे हैं. हजारीबाग के सिप्टन रिपोर्ट और बंगाल व ओडिशा के गजेटियर में भी इसका जिक्र है. ऐसे में कुड़मी समाज का आंदोलन बिल्कुल जायज है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/CHURAMAN-MAHTO-1_570-150x150.jpg"

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अब तो आंदोलन ही विकल्प : चुरामन

कुड़मी-आदिवासी आंदोलन समिति के सदस्य चुरामन महतो ने कहा कि अब आंदोलन ही विकल्प बचा है. रांची, जमेशदपुर आदि जगहों की तरह हजारीबागव अन्य इलाकों में भी आंदोलन करने की जरूरत है. कुड़मी को एसटी का दर्जा दिलाने के लिए एकजुटता की जरूरत है. समाज के हर लोगों को अपना अधिकार पाने के लिए सड़क पर उतरना होगा. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/PREMCHAND-MAHTO_395-150x150.jpg"

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हम अधिकार लेकर रहेंगे : प्रेमचंद महतो

कुड़मी-आदिवासी आंदोलन समिति के सदस्य प्रेमचंद महतो ने कहा कि हम कुड़मी अपना अधिकार लेकर रहेंगे. अभी जो आंदोलन हो रहा है, उससे आम आदमी को परेशान करना नहीं चाह रहे हैं. सरकार बातों को सीधे तरीके से सुन लेती तो अच्छा होता.रांची और जमशेदपुर का आंदोलन तो झलक है, आगे आंदोलन की चिंगारी और तेज होगी. यह तो आगे समय ही बताएगा.

चांडिल

कोटशिला जंक्शन पर आदिवासी कुड़मी समाज का आंदोलन शुरू

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alt="" width="1600" height="720" /> पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत कोटशिला रेलवे स्टेशन परिसर में हजारों की तादाद में जय गोराम लिखा हुआ पीला झंडा हाथों में लिए और पीला गमछा कंधे पर लिए भीड़ जुटी है. कुड़मी जनजाति को एसटी में सूचीबद्ध करने के साथ कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने और सरना कोड लागू करने की मांग पर सभी रेल चक्का जाम आंदोलन में शामिल होने पहुंचे थे. तीखी धूप के कारण लोग रेल पटरियों पर कम और प्लेटफार्म और पेड़ की छांव में अधिक नजर आ रहे थे. दोपहर के लगभग 3:30 बजे भीड़ का एक बड़ा हिस्सा झालदा रेलवे स्टेशन की ओर पटरियों पर आधा किलोमीटर तक दौड़ते हुए नारेबाजी करते गए. वहां पता चला कि रास्ते में रेलवे की पैकिंग गाड़ी आ रही है. करीब आधा किलोमीटर दूर जाने के बाद भी लोगों को कोई गाड़ी नहीं मिली. वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि एक गाड़ी अभी आई थी, जो तुरंत वापस चली गई. इसके बाद आंदोलनकारी नारेबाजी करते हुए कोटशिला स्टेशन की ओर लौट गए.

पानी के लिए लगी भीड़

आंदोलन स्थल कोटशिला रेलवे जंक्शन में बड़ी तादाद में उपस्थित आंदोलनकारी जहां अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन से उत्साहित थे, वहीं तीखी धूप के कारण पीने के लिए पानी की तलाश करते हुए भी दिखे. स्टेशन पर मौजूद पनशाला में पानी पीने के लिए लोगों की भीड़ जमी थी. वहीं आंदोलन स्थल पर खीरा और चना बेचने वालों के सामने भी भीड़ जुटी रही.

सचिव के साथ वार्ता में शामिल नहीं होगा आदिवासी कुड़मी समाज : अजीत महतो

कुड़मी जनजाति को एसटी में सूचीबद्ध करने और अन्य मांगों को लेकर कुडमी समाज द्वारा पश्चिम बंगाल के विभिन्न स्थानों पर रेल और सड़क मार्ग में आवागमन अवरुद्ध कर आंदोलन किया जा रहा है. जगह-जगह किए जा रहे आंदोलन के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए कोलकाता बुलाया है. वार्ता के लिए सोमवार 10 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है. वहीं आदिवासी कुड़मी समाज के मूल मानता अजीत महतो ने कहा कि मुख्य सचिव के साथ होने वाले वार्ता में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार समाज को आश्वासन दे रही है. लेकिन कुड़मी जाति को आदिवासी की सूची में सूचीबद्ध करने के लिए प्रयास नहीं कर रही है.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर झूमे आंदोलनकारी

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और झारखंड के मुरी रेलवे स्टेशन के बीच स्थित कोटशिला जंक्शन में आदिवासी कुड़मी समाज के आंदोलनकारी रविवार सुबह से ही जमे थे. समाज को एसटी सूची में शामिल कराने के इस आंदोलन में क्या महिला क्या पुरुष और क्या बच्चे सभी बड़ी तादाद में स्टेशन परिसर में एकत्रित हुए. इस दौरान समाज के झूमर कलाकार अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से आंदोलनकारियों में जोश पैदा कर रहे थे. कुड़माली झूमर और लोक गीतों से लोग उत्साहित हो रहे थे. अलग-अलग भागों में बांट कर सामाजिक विकास और समाज के ज्वलंत मुद्दों पर परिचर्चा की जा रही थी. वहीं आंदोलन स्थल पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था.

कुड़मी समाज का कोटशिला स्टेशन पर प्रदर्शन

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alt="" width="1600" height="720" /> कुड़मी जाति को एसटी में शमिल करने को लेकर कुड़मी समाज द्वारा पांच दिनों से पश्चिमी बंगाल के पुरुलिया जिले के कुस्तौर और खड़गपुर के खेमासुली स्टेशन पर प्रदर्शन किया जा रहा था. राज्य सरकार से वार्तालाप के आश्वासन के बाद आंदोलन के पांचवे दिन रविवार की दोपहर 12.30 बजे कुड़मी समाज कुस्तौर स्टेशन से हट गया था. इस आंदोलन के खत्म होने के बाद रेलवे ने एक नोटिफिकेशन जारी किया जिसमें बताया गया कि 5 अप्रैल की सुबह 5 बजे से जारी यह आंदोलन रविवार की दोपहर 12.30 बजे समाप्त हो गया है. अब इस रूट में ट्रेनों का परिचालन किया जा सकेगा. हालांकि कुड़मी समाज के लोग कुस्तौर स्टेशन से हट चुके है, परंतु अब पुरुलिया जिले के कोटशिला स्टेशन पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है. हजारों की संख्या में कुड़मी समाज के लोग रविवार को कोटशिला स्टेशन पहुंचे और स्टेशन समेत रेलवे ट्रैक पर बैठकर नारेबाजी करने लगे. इस रूट पर पुरी से होकर दिल्ली जाने वाली निलांचल एक्सप्रेस का परिचालन होता है. इसके अलावा कई अन्य ट्रेनों का भी परिचालन इसी रूट से किया जाता है. अब इस स्टेशन पर प्रदर्शन होने से रेलवे को फिर से ट्रेनों को रद्द करना पड़ सकता है.

घाटशिला

हावड़ा-टाटानगर रूट पर ट्रेनों का परिचालन पांचवें दिन भी बंद रहा,लोग परेशान

कुड़मी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल के खेमासोली स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन के कारण हावड़ा-टाटानगर रूट से ट्रेनों का परिचालन रविवार को पांचवें दिन भी बंद रहने से घाटशिला रेलवे स्टेशन पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा है. जबकि रेल रोको आंदोलन से पूर्व घाटशिला स्टेशन यात्रियों की भीड़ लगी रहती थी. हावड़ा-जमशेदपुर की ओर आने जाने वाली पैसेंजर, एक्सप्रेस एवं मेमो सभी ट्रेनें रद्द किए जाने से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ट्रेनों का परिचालन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी डेली पैसेंजर को हो रही है. घाटशिला रेलवे स्टेशन से लगभग हजारों की संख्या में मजदूर मजदूरी करने जमशेदपुर जाते थे. ट्रेन बंद होने से इन लोगों के समक्ष भी भुखमरी की स्थिति बन गई है. हर वर्ग तथा व्यवसाय से जुड़े लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. शासन-प्रशासन की ओर से आंदोलन समाप्त करने के अब तक कोई पहल नहीं की गई है. ज्ञात हो कि कुड़मी जनजाति को एसटी में शामिल करने और कुड़मी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करने की मांग को लेकर अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आदिवासी कुड़मी समाज द्वारा पश्चिम बंगाल के खेमाशुली स्टेशन पर पिछले 5 अप्रैल से रेलवे ट्रैक जाम कर दिया गया है, जबकि 4 अप्रैल से पश्चिम बंगाल कुड़मी समाज ने एनएच 49 जाम कर दिया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/अंजन-कुमार-महतो-घाटशिला-150x150.jpg"

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आंदोलन हमारा मौलिक अधिकार है : अंजन कुमार

धालभूमगढ़ के व्यवसायी अंजन कुमार महतो ने कहा है कि घांघर घेरा तथा रेल टेका-डहर छेंका आन्दोलन हमारे समुदाय का मौलिक अधिकार लेने के लिए किया जा रहा है. सरकार समाज के लोगों को आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रही है. हमारे आन्दोलन में सभी समुदाय के लोगों से सहयोग की अपील करते हैं. हम लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द मांग पूरी की जाए. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/र्गा-पदों-महतो-घाटशिला-150x150.jpg"

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किसान भाइयों को काफी परेशानी हो रही है : दुर्गापदो

धालभूमगढ़ के किसान दुर्गापदो महतो कहते हैं कि रेल एवं सड़क जाम से हमारे किसान भाइयों को भी काफी परेशानी हो रही है. लेकिन किसी भी अधिकार को प्राप्त करने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है. भूखे पेट रहकर भी इस आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है. अपने हक-अधिकार लड़ाई में सभी सहयोग कर रहे हैं. इसके लिए सभी को धन्यवाद एवं आभार. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/अभिजीत-महतो-छात्र-घाटशिला-150x150.jpg"

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दुख है कि हमलोगों को वंचित कर दिया गया : अभिजीत महतो

धालभूमगढ़ के छात्र अभिजीत महतो कहते हैं कि हम सभी युवा वर्ग को यह दुःख लगता है कि 1950 तक हमारे जाति-समुदाय एसटी जाति में थे. उस समुदाय के लोगों को नौकरी में रिजर्वेशन प्राप्त है, परन्तु हम लोग वंचित हैं. अतः हम संविधानिक अधिकार लेकर रहेंगे. इसके लिए चाहे जो भी लड़ाई लड़नी होगी, हम सब आगे भी लड़ने को तैयार हैं.

देवघर

आंदोलन का असर, जसीडीह होकर गुजरने वाली 7 ट्रेनें रद्द

पश्चिम बंगाल के खेमुशुली व पुरुलिया में कुड़मी समाज को आदिवासी का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है. आंदोलन का असर रेल और सड़क यातायात पर पड़ा है. दर्जनों ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. बसों का परिचालन बंद है. आंदोलन के कारण जसीडीह रेलवे रूट होकर गुजरने वाली 7 लंबी की दूरी की ट्रेनें 8 अप्रैल से आगामी दो दिनों के लिए रद्द कर दी गई है. कुछ ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है. रेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रद्द ट्रेनें निम्न हैं- अप लाइन पर दानापुर-टाटा सुपर एक्सप्रेस, बिलासपुर-पटना एक्सप्रेस, दुर्ग-राजेंद्र नगर साउथ बिहार एक्सप्रेस. वहीं डाउन लाइन पर दानापुर- टाटा सुपर एक्सप्रेस, पटना-बिलासपुर सुपरफास्ट, राजेंद्रनगर-दुर्ग एक्सप्रेस, टाटा-थावे एक्सप्रेस.

धनबाद

कुड़मी को आदिवासी का दर्जा देने की मांग को लेकर पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा पर चल रहे आंदोलन से धनबाद बुरी तरह प्रभावित है. धनबाद से टाटा, खड़गपुर और रांची की ओर जाने वाली करीब एक दर्जन ट्रेनें ठप हैं. हालांकि बस सेवा पर इस आंदोलन का अभी तक असर नहीं देखने को मिला है. बसों का परिचालन जारी है. ट्रेन सेवा ठप रहने से धनबाद कोयलांचल के आम लोग आंदोलनकारियों और राज्य सरकार दोनों को दोषी ठहरा रहे हैं.

परेशानी के लिए सरकार जिम्मेवार : अरविंद कुमार

आदिवासी कुर्मी समाज के झारखंड प्रदेश संयोजक अरविंद कुमार महतो ने कहा कि कुर्मी समाज पिछले 76 साल से अपने हक की मांग करता रहा है, लेकिन केंद्र और राज्य की गूंगी-बहरी सरकारों पर कोई असर नहीं हुआ. मजबूरन हमलोगों को रेल मार्ग बाधित करना पड़ रहा है. हमलोग अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे है, कुछ गलत नहीं कर रहे हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/VISHWANATH-MAHATO_664-150x150.jpg"

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अधिकार की लड़ाई लड़ना गलत नहीं : विश्वनाथ महतो

धनबाद की ढोकरा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य विश्वनाथ महतो ने कहा कि ये तो हमारी पैतृक लड़ाई है. हमारे पूर्वज आदिवासी थे तो हम क्यों नहीं हो सकते. देश की आजादी के बाद हमें ओबीसी की सूची में डाल दिया गया, आज उसी भूल को हमलोग सुधारना चाहते हैं. लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/KHEDAN-MAHATO_843-150x150.jpg"

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आंदोलन से कोई दिक्कत नहीं हो रही : खेदन महतो

सरायढेला के रहने वाले खेदन महतो ने कहा कि कुड़मी समाज के लोगों को अपने हक के लिए आंदोलन करना जरूरी हो गया था. क्योंकि सरकार वार्ता के नाम पर कुड़मी समाज को अब तक बरगलाती रही है. उन्होंने कहा कि जल्द मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और उग्र होगा. इस आंदोलन से आदिवासी कुड़मी समाज को कोई दिक्कत नहीं है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/SONU-SINGH_726-150x150.jpg"

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कुड़मी समाज के आंदोलन से आम लोगों को परेशानी : सोनू

हीरापुर निवासी सोनू सिंह ने कहा कि मुझे एक कंपनी में इटरव्यू देने रांची जाना था. सुबह रेलवे स्टेशन गया, तो पता चला कि उधर की सभी ट्रेनें कैंसल हैं. अंतत: रांची नहीं जा सका. मेरे जैसे सैकड़ों लोगों को ऐसी परेशानी हुई है. अपने हक के लिए सरकार के खिलाफ आंदोलन करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन ट्रेन और बसों को रोकना उचित नहीं है. [wpse_comments_template]

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