वित्तीय वर्ष 2021-22 में 25 पैसे प्रति यूनिट बिजली दर बढ़ाने का है प्रस्ताव
जेबीवीएनएल ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में वर्तमान बिजली दर से 25 पैसा प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था. मगर आयोग के निष्क्रिय होने के कारण बढ़ोतरी प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो सका. आयोग के पास वित्तीय वर्ष 2021-22, 22-23 और 2023-24 का बिजली टैरिफ का पिटीशन दिया जा चुका है. लेकिन आयोग ने अभी वित्तीय वर्ष 2021-22 के बिजली टैरिफ पर कार्यवाही शुरू की है. आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह तीनों वर्ष का एक साथ टैरिफ पर निर्णय लेगा या फिर एक-एक कर. यह पूरी तरह से आयोग पर निर्भर करेगा. हालांकि उपभोक्ताओं ने पूर्व के वर्षों को छोड़ कर वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए टैरिफ निर्धारित करने का अनुरोध किया था.क्या कहा उपभोक्ताओं ने
जेबीवीएनएल से नहीं संभल रहा तो निजी हाथों में सौंप दिया जाए
जमशेदपुर आये उपभोक्ता अशोक बियानी ने कहा कि जेबीवीएनएल का हर डाटा और आंकड़ा झूठ का पुलिंदा है. इससे बिजली लेने वाली औद्योगिक इकाई के लोग परेशान हैं. जिन क्षेत्रों में विकल्प है, वहां के औद्योगिक कंज्यूमर दूसरी बिजली कंपनी से बिजली लेने का विकल्प चुन लिया है. क्योंकि जेबीवीएनएल सुधरने नहीं जा रहा है. जब जेबीवीएनएल से बिजली व्यवस्था नहीं संभल रहा है, तो इसे निजी हाथों में सौंप दिया जाए. वर्तमान वित्तीय वर्ष के टैरिफ क्यों सुनवाई नहीं हो रही है.जेबीवीएनएल आयोग और कोर्ट का आदेश भी नहीं मानता है
जेसिया चेयरमैन अंजय पेचरीवाल ने कहा कि सिक्यूरिटी डिपोजिट को लेकर आयोग ने ही आदेश दिया था. मगर यह राशि कंज्यूमरों को आज तक वापस नहीं मिली. बिजली बिल में बिजली सप्लाई आवर अंकित नहीं किया जाता है. जब आप पूरे घंटे बिजली नहीं देते हैं, तो फिर फिक्स्ड चार्ज क्यों दें. जेबीवीएनएल इंडस्ट्रियल इकाई को बिजली देने पर फोकस करता ही नहीं है. जबकि सबसे अधिक रेवेन्यू हम ही लोग देते हैं. इसलिए टैरिफ पिटीशन को रद्द करें और आदेश नहीं मानने वाले अधिकारियों को दंडित करें.जेबीवीएनएल में एक स्वतंत्र निदेशक बहाल हो
केदारनाथ दास ने कहा कि सवाल यह है कि टैरिफ क्यों बढ़े. जो योजना बिजली विभाग चलाता है, क्या इसका लाभ कंज्यूमरों को मिलता है. केवल डाटा-आंकड़ा के खेल से नहीं चलेगा. जेबीएनएल पहले कंज्यूमरों को 100 प्रतिशत संतुष्ट करे. जब तक जेबीवीएनएल में स्वतंत्र निदेशक नहीं होगा, सही हिसाब-किताब नहीं होगा. इसलिए आयोग जेबीवीएनएल में एक स्वतंत्र निदेशक बहाल कराए.इंडस्ट्रीज को आज तक क्वालिटीपूर्ण बिजली नहीं मिली
सरायकेला से आए उद्यमी हर्ष कंसल ने कहा कि झारखंड गठन के 23 साल बाद इंडस्ट्रीज को क्वालिटीपूर्ण बिजली नहीं दे पाया. उद्योग और व्यवसाय का बहुत बूरा हाल है. बिना सूचना के बिजली कटौती, वोल्टेज समस्या आज तक नहीं सुधरी. यही कारण है कि डीवीसी और जुस्को एरिया के कंज्यूमर इन कंपनियों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं. मगर हमारे पास तो विकल्प भी नहीं है.कंज्यूमर के प्रति कोई जवाबदेह नहीं है जेबीवीएनएल
चेंबर के अजय भंडारी ने कहा कि जनसुनवाई में जन ही गायब रहता है. केवल कुछ लोग हिस्सा लेते हैं. रही बात जेबीवीएनल की तो कुछ भी हो जाए इस पर कोई असर नहीं होगा. घाटा होगा तो सरकार इसका घाटा पाट देगी. जेबीवीएनएल एक कुख्यात कंपनी बन कर रह गयी है. कंज्यूमर के प्रति जवाबदेही इसके पास नहीं है. इसके अफसर आयोग और कोर्ट के आदेश को नहीं मानते हैं.रामनवमी में रांची ब्लैक आउट, कैसी व्यवस्था है ये
व्यवसायी जीके तुलस्यान ने कहा कि यह कैसी कंपनी है या संस्था है, जो योजना तो शुरू करती है, मगर यह पूरी नहीं होती है. रांची में यूजी केबल का काम शुरू हुआ. क्या इसके अफसर बता सकते हैं कि यह काम पूर्ण हुआ या नहीं. रामनवमी में घंटों रांची में ब्लैक आउट हो जाती है. यह कैसी बिजली व्यवस्था है. इसे भी पढ़ें – सीयूआइटी">https://lagatar.in/number-of-applicants-increased-by-26-thousand-in-cuit-atmosphere-of-happiness-in-vbu/">सीयूआइटीमें बढ़ी 26 हजार आवेदकों की संख्या, विभावि में खुशी का माहौल [wpse_comments_template]

Leave a Comment