Hazaribagh : झारखंड में जनसेवक पिछले 37 दिनों से हड़ताल पर हैं. हजारीबाग समाहरणालय में धरने पर बैठे जनसेवकों ने बताया कि झारखंड जनसेवक संघ ने तय किया है कि अब यह आंदोलन रांची नेपाल हाउस के सामने दिया जाएगा. हजारीबाग से 58 जनसेवक जिनमें महिला भी शामिल हैं. गुरुवार की सुबह 7:00 बजे रांची के लिए कूच करेंगे. संघ का कहना है कि सरकार ने अब तक सिर्फ मौखिक आश्वासन दिया है. इस कारण क्षुब्ध होकर राज्य मुख्यालय नेपाल हाउस के सामने अनिश्चितकालीन धरना देने जा रहे हैं. जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती है, आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा. जन सेवकों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी वो अपना आंदोलन नेपाल हाउस के सामने करते रहेंगे. नेपाल हाउस में ही कृषि विभाग का कार्यालय है. मंत्री और पदाधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है. अगर स्थिति साफ नहीं हुई तो काम पर भी नहीं लौटेंगे.
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अतिरिक्त प्रभार से प्रभावित हो रहे विभिन्न विभागों के काम
जनसेवकों ने बताया कि कई ऐसे जनसेवक हैं, जिन्हें अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. ऐसे में प्रखंड के कई काम प्रभावित हो रहे हैं. देवेंद्र कुमार जो डाड़ी प्रखंड में सेवा दे रहे हैं, उन्हें प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, सामाजिक सुरक्षा और बीएलओ सुपरवाइजर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. इसी तरह चुरचू प्रखंड में जनसेवक के पद पर सेवा देने वाले त्रिदेव कुमार को पंचायती राज पदाधिकारी, सांख्यिकी पदाधिकारी और बीएलओ सुपरवाइजर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. रवि रंजन को कृषि पदाधिकारी के साथ-साथ आपूर्ति पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह इस वक्त बड़कागांव में पदस्थापित हैं. भास्कर राज को कल्याण पदाधिकारी, सांख्यिकी पदाधिकारी, एजीएम और बीएलओ सुपरवाइजर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वह अभी बड़कागांव में पदस्थापित हैं.ग्रेड पे घटाने व 11 सूत्री मांगों को लेकर कर रहे प्रदर्शन
नौ मई से राज्य के सभी जनसेवक ग्रेड पे घटाए जाने के विरोध और 11 सूत्री मांगों को लेकर जिला मुख्यालयों में धरने पर हैं. जनसेवक संघ के अध्यक्ष काशीनाथ गुप्ता ने बताया कि हड़ताल के इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार ने अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है. जिसके बाद जनसेवकों ने रांची के नेपाल हाउस के सामने धरना देने का फैसला लिया.जनसेवकों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
जनसवेक संघ के सचिव अशोक कुमार यादव ने कहा कि सभी प्रखंडों में जनसेवक कृषि कार्य के अतिरिक्त कल्याण, खाद्य सुरक्षा, सांख्यिकी, पंचायती राज आदि विभागों के भी कार्यों का निष्पादन करते हैं. इससे सरकार का कार्य सुचारू रूप से चलता है और सरकार के कोष पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है. ऐसी स्थिति में भी सरकार का असहयोगात्मक रवैया समझ के परे है. मीडिया प्रभारी रवि राजा ने कहा कि ग्रामीण जनता को हड़ताल के कारण होने वाली समस्याओं की सारी जिम्मेवारी झारखंड सरकार की है. सरकार का रवैया अगर उदासीन ही रहता है, तो जनसेवक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. इसे भी पढ़ें: जमुआ">https://lagatar.in/jamua-8-months-innocent-missing-at-midnight-dead-body-recovered-from-well-in-the-morning/">जमुआ: आधी रात 8 माह का मासूम लापता, सुबह कुआं से शव हुआ बरामद [wpse_comments_template]
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