Puri : ओडिशा के पुरी में आज गुरुवार को बारिश के बीच भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ. इससे पूर्व लाखों भक्तों ने पहांडी रस्म का अवलोकन किया. इस रस्म में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा की प्रतिमाओं को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है. इसके साथ ही ओडिशा में नौ दिन तक चलने वाली सालाना रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया.

घंट की गूंज और शंख व झांझ की आवाज़ के बीच सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को मुख्य मंदिर से बाहर निकाला गया और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ में बिठाया गया. पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का चक्र-अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है.इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र की मूर्ति को उनके तालध्वज रथ तक एक खास जुलूस में ले जाया गया.
सेवादारों द्वारा शून्य पहांडी' (रथ तक ले जाते समय देवी का आकाश की ओर देखना) कहे जाने वाले एक खास जुलूस में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा की मूर्ति को उनके रथ तक लाया गया. सभी रथ मंदिर के सिंह द्वार के सामने खड़े किये गये थे. जहां से वे श्री गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलेंगे यह मंदिर(गुंडिचा) देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है. यह पुरी के 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर है.
जब भगवान जगन्नाथ की मूर्ति को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ग्रैंड रोड पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा भक्तों अपने हाथ उठाए और जय जगन्नाथ के नारों से आकाश गुंजायमान कर दिया. इस अवसर पर ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने 'कालिया ठाकुर' के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें
Leave a Comment