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पुरुलिया: मानव मन का ब्रह्मांडीय मन में विलीन होना ही योग: आचार्य सुरेश्वरानंद

 
Jamshedpur: आनंद मार्ग प्रचारक संघ ने आज मंगलवार को आनंद नगर, पुरुलिया में अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया. आनंद मार्ग के स्कूली बच्चों और अन्य स्कूलों में भी प्रदर्शन किया. लड़के-लड़कियां भुजंगासन, योगमुद्रा और योगासन किया जो फेफड़ों से संबंधित और अन्य बीमारियों के लिये फायदेमंद है. आचार्य सुरेश्वरानंद अवधूत और अवधूतिका आनंद शिवप्रेम (आचार्य) ने जीवन के तीन क्षेत्रों में योग के महत्व को समझाया. उन्होंने कहा, श्री श्री आनंदमूर्तिजी के अनुसार मानव अस्तित्व है- शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक.  यहां योग का अर्थ केवल आसन नहीं है बल्कि इसका अर्थ है ईश्वर के साथ एकता (एकीकरण). तो हम आसानी से इसे योगासन कह सकते हैं. इसे भी पढ़ें: देवघर">https://lagatar.in/deoghar-bus-service-may-start-from-inter-state-bus-terminal-in-shravani-mela/">देवघर

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आसन का अर्थ है शारीरिक आराम और मानसिक स्थिरता

उन्‍होंने कहा कि आसन का अर्थ है शारीरिक आराम और मानसिक स्थिरता. योग की तीन परिभाषाएं हैं. महर्षि पतंजलि के अनुसार सभी प्रवृत्तियों का निरोध ही योग है.  योग की दूसरी व्याख्या सभी चिंताओं से मुक्ति है. लेकिन योग का वास्तविक अर्थ जल और चीनी की तरह एक होना है. उन्होंने कहा कि जब मानव मन अपने अस्तित्व को बनाए बिना ब्रह्मांडीय मन में विलीन हो जाता है, तो इसे वास्तविक योग कहा जाता है. योग का उक्त अर्थ भगवान शिव, भगवान कृष्ण और श्री श्री आनंदमूर्तिजी द्वारा दिया गया है. यह जानकारी आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत ने दी. इसे भी पढ़ें: बिहारः">https://lagatar.in/bihar-internet-restored-in-20-districts-service-was-stopped-after-violence-on-agneepath-scheme/">बिहारः

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