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पुतिन यू्क्रेन पर न्यूक्लीयर हमला कर चुके होते, भारत और चीन ने उसे रोका है : एंटोनी ब्लिंकेन

NewDelhi : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यू्क्रेन पर काफी पहले ही न्यूक्लीयर हमला कर चुके होते. संभव है कि उन्हें ऐसा करने से भारत और चीन ने रोका है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक इंटरव्यू में यह बात कही. G20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी भारत यात्रा से पूर्व द अटलांटिक को दिये इंटरव्यू में ब्लिंकेन ने कहा, मास्को द्वारा बार-बार परमाणु हमले की धमकी दी गयी. यह चिंतित करने वाला विषय है. इसे भी पढ़ें : माफियाओं">https://lagatar.in/will-mix-the-mafias-into-the-soil-cm-yogi-said-in-the-assembly-in-umesh-pal-murder-case-fir-on-atiq-ahmed-family/">माफियाओं

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रूस कई दशकों से भारत के नजदीक रहा है

एंटोनी ब्लिंकेन ने इंटरव्यू में कहा, हमने उन सभी देशों इस युद्ध को खत्म करवाने के लिए आग्रह किया, जिनके संबंध रूस से अच्छे हैं. मुझे (ब्लिंकेन) लगता है कि इसका कुछ असर हुआ है. इसमें चीन और भारत भी शामिल है. कहा कि दोनों देशों ने रूस को यूक्रेन पर परमाणु हमला करने से रोकने के लिए कोशिश की और सफलता पायी. ब्लिंकेन का कहना था कि रूस कई दशकों से भारत के नजदीक रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि भारत केवल रूस पर भरोसा करने की बजाय हमारे साथ और फ्रांस जैसे अन्य देशों के साथ साझेदारी में आगे बढ़ा है. इसे भी पढ़ें :  कांग्रेस">https://lagatar.in/congress-general-assembly-sonia-said-this-is-a-challenging-time-for-the-country-and-the-congress-conspiracy-is-being-hatched-to-break-democracy/">कांग्रेस

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भारत और चीन सहित  32 सदस्य अनुपस्थित रहे

जान लें कि भारत और चीन 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को यूक्रेन संघर्ष की एक साल की सालगिरह पर यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए मतदान में शामिल नहीं हुए. 141 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, वहीं सात ने इसका विरोध किया. भारत और चीन उन 32 सदस्यों में से थे, जो इसमें अनुपस्थित रहे.

यह युद्ध का युग नहीं हो सकता

जान लें कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत और चीन का रुख शांतिपूर्ण बातचीत के आह्वान की बजाय अब तक न्यूट्रल है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि यूक्रेन संघर्ष के प्रति भारत का दृष्टिकोण जन-केंद्रित बना रहेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को दोहराते हुए कहा कि यह युद्ध का युग नहीं हो सकता. [wpse_comments_template]

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