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alt="" width="1280" height="576" /> तस्वीरों मेंः घायलों से मिलते पूर्व सीएम रघुवर दास
सदर अस्पताल में घायलों से मिले
इसके बाद रघुवर दास लोहरदगा के सदर अस्पताल में घायलों से मिलने पहुंचे. जहां लोगों ने बताया कि उनका जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से निकला था. अचानक कब्रिस्तान की ओर से पत्थरों की बारिश होने लगी. लोगों को बचाव करने तक का अवसर नहीं मिला. इसके बाद प्रशासन का रवैया भी ढुलमुल रहा है. निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों के खिलाफ दिखावे की कार्रवाई हो रही है. इसे भी पढ़ें-डीसी">https://lagatar.in/lagatar-dc-sought-list-of-office-workers-of-all-departments-in-48-hours-countdown-for-panchayat-elections-started/">डीसीने 48 घंटे में सभी विभागों के कार्यालयकर्मियों की मांगी सूची, पंचायत चुनाव की उल्टी गिनती शुरू
कई संगठनों के प्रतिनिधियों से ली जानकारी
रघुवर दास ने लोहरदगा में भाजपा के कार्यकर्ताओं समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और स्थिति की जानकारी ली. इसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पहले से तैयारी कर घटना को अंजाम दिया गया. जुलूस में सुरक्षा के नाम पर मात्र तीन-चार पुलिसकर्मी थे, उनके पास डंडा भी नहीं था. 2020 में लोहरदगा में ही सीएए-एनआरसी के समर्थन में निकाले गये जुलूस में पत्थराव हुआ था, उसमें नीरज राम प्रजापति नाम के युवक की मौत हो गयी थी. इसके बाद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया.लोहरदगा की घटना सरकार की विफलता का परिणाम
उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना हेमंत सरकार की विफलता का परिणाम है. इस सरकार के सत्ता में आते ही राज्य में विघटनकारी शक्तियां सक्रिय हो गयी हैं. रांची में सरहूल की शोभायात्रा रोकी जाती है, तो खूंटी में मंगला यात्रा को रोक दिया जाता है. यह केवल वोटबैंक व तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम है. राज्य सरकार उनके सामने नतमस्तक है. झारखंड में बढ़ती सांप्रदायिक घटना के पीछे पीएफआइ के हाथ से इनकार नहीं किया जा सकता है. उनका काम ही सांप्रदायिक उन्माद और अराजकता फैलाना है. क्षेत्र से आनेवाले राज्य सरकार के मंत्री व एक राज्यसभा सांसद की भूमिका भी संदेहास्पद है. रघुवर दास ने पूरी घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की. इसे भी पढ़ें-धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-in-the-scorching-heat-he-fell-down-after-consuming-fire/">धनबाद: झुलसती गर्मी में गश खाकर गिर पड़ा धरना पर बैठा झमाडा आश्रित [wpse_comments_template]

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